न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के अंग्रेजी एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार अल्लामा इकबाल के विचारों तथा काव्य पर एक व्याख्यान का आयोजन आर्ट फैकल्टी लाउंज में किया गया।
वियना से आए डॉक्टर स्टिफन पॉप ने कहा कि इकबाल का काव्य मूलरूप से संदेशात्मक है और उन्होंने काव्य द्वारा अपने विचारों की अभिव्यक्ति को अपना उद्देश्य बनाया था।
डॉ. पॉप ने संरचनात्मक विश्लेषण की तकनीक का प्रयोग करते हुए यह बताने का प्रयत्न किया कि इकबाल के काव्य में 1920 के बाद की छायावाद विशेष रूप से दृष्टिगोचर होती है।
डॉ. पॉप ने कहा कि इकबाल की फारसी और उर्दू शायरी न केवल उनके राजनैतिक विचारों को प्रतिबिंबित करती है, बल्कि उससे यह भी पता चलता है कि वह विलियम वर्ड्स वर्थ सहित हिंदी साहित्य के कई सौंदर्यवादी साहित्यकारों एवं कवियों से प्रभावित थे।
डॉ. पॉप ने इस अवसर पर इकबाल की कुछ प्रख्यात कविताओं का ईरानी कवि बहार तथा हिंदी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताओं से तुलना की।