इस्मत ने पाखंडों को तोड़ा, परंपरा परस्ती पर किया कठोर वार
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
साहित्यकार प्रो. नमिता सिंह ने कहा कि इस्मत चुगताई ने एक वास्तविक लेखिका की जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए समाज में जारी विभिन्न प्रकार के पाखंडों एवं आडंबरों को तोड़ा तथा परंपरा परस्ती पर कठोर वार किये।
प्रो. सिंह गुरुवार को एएमयू की पूर्व छात्रा एवं प्रसिद्ध उपन्यासकार इस्मत चुगताई पर प्रकाशित होने वाली पुस्तक ‘एन अनसिविल वूमन’ की संपादक डॉ. रखशंदा जलील के साथ एक साहित्यिक परिचर्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहीं थीं। इस पुस्तक को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है।
उन्होंने कहा कि इस्मत का कारनामा यह है कि उन्होंने साहित्य को एक नया मोड़ दिया तथा एक ऐसे समय में जब मंटो, राजेंद्र सिंह बेदी तथा कृष्ण चंद्र जैसे फिक्शन लेखक समाज में प्रगतिशील आंदोलन जगाने में लीन थे, इस्मत ने कोरे नारीवाद से विभिन्न खालिस लैंगिक बराबरी पर आधारित परंपराओं को विकसित करने के लिए कलम उठाई।
उन्होंने कहा कि इस्मत ने समाज में महिलाओं की बदहाली को अपना विशेष विषय बनाया तथा उनकी बेबसी के विरुद्ध पुरुषों की सामंती व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराते हुए विद्रोह का ध्वज उठाया। उर्दू विभाग के प्रो. तारिक छतारी ने कहा कि इस्मत की आलोचनात्मक सोच अत्यधिक गहराई लिए थी। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘पोम पोम डार्लिंग’ में कुर्रतुल ऐन हैदर के प्राथमिक लेखों के हवाले से ऐसी आलोचनात्मक सूझ बूझ का प्रमाण प्रस्तुत किया है, जिसका तकाजा है कि उनके लेखों पर भी पूर्ण आलोचनात्मक सूझ बूझ के साथ कार्य किया जाए।
पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि इस्मत ने अपने लेखों में उन विषयों को बरतने का प्रयास किया जिन पर समाज खामोश रहता है। संचालन प्रो. मोहम्मद सज्जाद ने किया।
इस्मत के व्यक्तित्व निर्माण में अलीगढ़ की बड़ी भूमिका
परिचर्या के दौरान प्रो. आसिम सिद्दीकी ने डॉ. रखशंदा जलील से पूछा कि इस्मत को आम तौर पर मंटो का नारी प्रारूप कहा जाता है। इस संबंध में उनकी क्या राय है। डॉ. जलील ने उत्तर दिया कि इस्मत चुगताई को मंटो का कलमी हमजाद माना जाता है। उनके दरमियान काफी समानताएं पाई जाती हैं। इस्मत की खूबी यह है कि उनके चरित्र किसी गिरोह बंद दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित नहीं करते और वह स्वयं भी आम कल्पना के विरुद्ध इस्मत को नारी आंदोलन की अलंबरदार स्वीकार नहीं करती।
इस्मत के अलीगढ़ से संबंधों के बारे में प्रो. आसिम सिद्दीकी के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि इस्मत के व्यक्तित्व निर्माण में अलीगढ़ की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने अपनी कहानियों में अलीगढ़ में अपने निवास के दौरान संपर्क में आने वाले लोगों को चरित्र के रूप में प्रयोग किया है।