साल 2021 में डेंगू ने लोगों पर इस कदर कहर बरपाया था कि लोग घर-घर बीमार पड़ गए थे। पिछले साल के अनुभव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शहर के डेंगू मच्छर के मुफीद इलाकों को चिन्हित किया है। अपर निदेशक स्वास्थ्य को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक 16 इलाकों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है, जहां पर डेंगू लार्वा पनपने की आशंका जताई गई है। साथ ही मच्छर जनित अन्य बीमारियां भी फैल सकती हैं। इस सूची में शहर की स्वर्णजयंती नगर व विद्यानगर कॉलोनियां भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में 1400 मरीजों की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी, जबकि इससे इतर लोगों ने निजी अस्पतालों में भी डेंगू का इलाज कराया था। डेंगू से कई लोगों की जान गई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई थी। पिछले साल मलखान सिंह जिला अस्पताल में जंबो पैक की सुविधा नहीं थी।
दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में एलाइजा टेस्ट तक नहीं हो पा रहा था। ऐसे में लोग अपनी रिपोर्ट पाने के लिए भटक रहे थे। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि शहर में विभिन्न इलाकों में डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों के वाहक मच्छरों के लार्वा पनप रहे हैं। इस वजह से प्रतिवर्ष अलीगढ़ में डेंगू रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इन इलाकों में बेहतर प्रबंध के लिए अपर निदेशक को पत्र लिखकर जानकारी दी है।
डेंगू संवेदनशील इलाके व जलभराव क्षेत्र
- एडीए कॉलोनी, शाहजमाल- सरकारी पानी की टंकी के नीचे लार्वा जनित स्थितियां।
- नगला मसानी, इंदिरा नगर- सरकारी पानी की टंकी के नीचे नगला मसानी में लार्वा।
- चूहरपुर, बरौला जाफराबाद - नई बस्ती, फायर बिग्रेड कालोनी, मेलरोज बाईपास के तालाब।
- विद्यानगर, स्वर्ण जयंती नगर, किशनपुर- सुरेंद्र नगर में सरकारी पानी की टंकी के बराबर का तालाब।
- नौरंगाबाद छावनी, विकास नगर, महाराणा प्रताप नगर- विकास नगर, कमालपुर बाईपास रोड, एटा चुंगी, गोविंद नगर, सरोज नगर, कुंवर नगर, महाराणा प्रताप नगर।
- गंभीरपुरा, पला- कालीदह तालाब।
- भमोला, कबीर कालोनी- भमोला तालाब।
- महफूज नगर, जलालपुर- नीवरी मोड़।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया दस्तक अभियान
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जनपद में दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता द्वारा हर परिवार से संपर्क स्थापित कर क्या करें, क्या न करें की जानकारी दी जा रही है। आशा कार्यकर्ता को 15 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के घरों अथवा जिस घर में टीबी के रोगी हों, वहां पर स्टीकर भी चिपकाना है। साथ ही मच्छर से बचाव के प्रति आमजन को जागरूक करना है। क्षेत्रवार ऐसे मकानों की सूची तैयार की जाएगी, जहां घरों के भीतर मच्छरों का प्रजनन पाया गया हो। इसके अलावा, बुखार के रोगियों की सूची, इनफ्लुएंजा आदि से ग्रसित रोगियों का विवरण, कुपोषित बच्चों की सूची, ऐसे मकानों की सूची जहां घरों के भीतर मच्छरों का लार्वा पाया गया हो, सभी जानकारियाें को आशा अपनी रिपोर्ट के साथ प्रतिदिन कार्य की समाप्ति पर क्षेत्रीय एएनएम के माध्यम से ब्लॉक मुख्यालय पर उपलब्ध कराएंगी ताकि इन रोगियों का समुचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।