न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बीलिब और एमबीए के बाद अब मॉस कॉम प्रवेश परीक्षा का पेपर आउट होने के शक से खलबली मच गई है। अब पुलिस मॉस कॉम की प्रवेश परीक्षा पर भी पूरा ध्यान दे रही है। वजह ये है कि एमबीए प्रवेश परीक्षा का पेपर आउट करने का आरोपी सुभान मॉस कॉम की प्रवेश परीक्षा में बैठा था। सुभान अभी जेल में है। उसके व्हाट्सएप नंबर की जांच पड़ताल में एक आंसर की मिली है। पुलिस को शक है कि ये मॉस कॉम की आंसर की है। शनिवार को इस सिलसिले में पुलिस एएमयू पहुंची और संबंधित अधिकारियों से बात की।
इस प्रकरण की जांच कर रहे सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा। एसएसपी आकाश कुल्हरि का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी है। एमबीए प्रवेश परीक्षा के दौरान बनाया गया व्हाट्स एप नंबर ग्रुप की पूरी डिटेल के आने के बाद ही आंसर की मिलाई जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि हकीकत में पेपर आउट हुआ या नहीं।
इधर, एक ही सत्र में दो प्रवेश परीक्षाओं के पेपर आउट होने की घटनाओं से एएमयू प्रशासन पहले से ही हलाकान है। अब मॉस कॉम का पेपर आउट होने के शक ने इस तनाव और बढ़ा दिया है। जिस पर विवि इंतजामिया अपने तथ्यों से सफाई दे रहा है। एएमयू जनसंपर्क विभाग के मेंम्बर आफ इंचार्ज एवं मास कम्युनिकेशन के विभागाध्यक्ष प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि मास कम्युनिकेशन का पेपर लीक होने के मामले में अब तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।
वाटर ब्वाय जिसने बीलिब और एमबीए का पेपर आउट करने में मदद की थी, उसकी ड्यूटी केवल सोशल साइंस और आर्ट फैकल्टी तक सीमित है, जहां एमबीए की प्रवेश परीक्षा हुई थी। ऐसे में वह स्टेटिक्स और एजूकेशन डिपार्टमेंट में हुए मास काम के पेपर में कैसे ड्यूटी दे सकता है..? क्योंकि मास कम्युनिकेशन का पेपर एजूकेशन और स्टेटिक्स डिपार्टमेंट में हुआ है।
इसलिए उसी एक वाटर ब्वाय के जरिये से मास कॉम का पेपर आउट होने का सवाल नहीं उठता है। अभी तक पुलिस या किसी भी परीक्षार्थी ने इस मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं की है। विवि स्तर पर हर प्रवेश परीक्षा की होने वाली जांच पड़ताल में भी ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है। मास कॉम की इस प्रवेश परीक्षा 551 आवेदन आए थे, जिसमें 403 ने परीक्षा दी। विभाग में इस कोर्स के लिए केवल 30 सीटें हैं।
कुलपति की भूमिका की जांच हो, एबीवीपी ने निशंक को किया ट्वीट
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ पुष्पेंद्र पचौरी ने अमुवि अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं के पेपर आउट होने के मामले में कुलपति प्रो. तारिक मंसूर की भूमिका की जांच करने की मांग की है। पुष्पेंद्र पचौरी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कहा है कि एएमयू के मुखिया कुलपति हैं। वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उनको स्वत: ही हट जाना चाहिए क्योंकि वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। डा. पचौरी ने केंद्र सरकार के नवनियुक्त मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक से ट्विटर के माध्यम से ये शिकायत की है। इस शिकायत को अलीगढ़ के वर्तमान भाजपा सांसद सतीश गौतम, भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल सहित अन्य नेताओं और अफसरों को भी भेजा गया है।