उन्होंने सूचना अधिकारियों को इस प्रक्रिया का ज्यादा से ज्यादा पालन करने को कहा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि सूचना मांगने वाला व्यक्ति अपनी अज्ञानता के कारण संबंधित विभाग के स्थान पर अन्य विभाग के पास अपनी अर्जी दे देता है और उक्त विभाग के सूचना अधिकारी उस प्रार्थनापत्र को व्यर्थ समझ कर रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। नियमानुसार उनका दायित्व बनता है कि वे उस प्रार्थनापत्र को संबंधित विभाग के पास भेजें और उसकी रिपोर्ट प्रार्थनापत्र देने वाले को सौंपे।
उन्होंने अपीलीय अधिकारियों के मामले में कहा कि अक्सर शिकायत मिलती है कि अपीलीय अधिकारी अपील नहीं सुनते। नियमानुसार उन्हें सप्ताह में एक दिन अपील जरूर सुननी चाहिये। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में दो लाख आवेदनों का निस्तारण हो चुका है और 32 हजार अभी भी पेंडिंग हैं। इनके निस्तारण के प्रयास हो रहे हैं।
राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि यदि कोई प्राईवेट संस्थान से आरटीआई में सूचना चाहता है तो उसे संबंधित विभाग के जरिए सूचना लेनी होगी। मसलन यदि वह प्राईवेट स्कूल के मामले में सूचना चाहता है तो उसे बीएसए अथवा डीआईओएस के माध्यम से सूचना मांगनी होगी।