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डॉली की मौत की जांच को गांव पहुंची टीम

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अमर उजाला के खुलासे पर सोमवार सुबह 9 बजे ही स्वास्थ्य टीम कुपोषण और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी डॉली के गांव पहुंच गई। एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा 4 सदस्यीय टीम के साथ दोपहर डेढ़ बजे पहुंचे और जांच पड़ताल की।

साथ ही रिश्वत की जांच के लिए विजयगढ़ सीएचसी भी गए। जांच में हर बात सामने आई। जांच अधिकारी ने बताया कि जांच अभी जारी है। मंगलवार को डॉली के पिता के बयान लिए जाएंगे। सोमवार को वह घर पर नहीं थे। उधर, डॉली की स्क्रीनिंग करने वाली आरबीएसके टीम के मेडिकल अफसर ने भी अपना बयान दर्ज करा दिया है।
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साहब! उस दिन भर्ती करा देते तो आज डॉली जिंदा होती
जांच टीम को डॉली की मां ही घर पर मिली, पिता मजदूरी के लिए अकराबाद गए थे। मां ने एसीएमओ को भी बताया कि 20 नवंबर को हम डॉली को भर्ती कराने को तैयार थे, लेकिन टीम बोली बेड खाली नहीं है। बाद में तब कॉल की जब डॉली का पिता मजदूरी के लिए दिल्ली में था। उसे कोई लेने नहीं आया और अकेली वो अलीगढ़ जा नहीं सकी। उधर जन्म के समय विजयगढ़ सीएचसी पर नर्स, दाई और एएनएम द्वारा 2 हजार रुपये रिश्वत लेने की बात भी डॉली की मां ने टीम को बताई। इस दौरान वो भावुक भी हो गईं और अपनी वेदना जाहिर की कि अब क्या फायदा, डॉली तो नहीं रही। डॉली पर 50-60 हजार फूंकने की पुष्टि अन्य ग्रामीणों ने भी की।

कुंवरपाल से भी ली रिश्वत
विजयगढ़ सीएचसी पर डॉली के गांव के कुंवरपाल से भी 1100 रुपये की रिश्वत ली गई थी। यह बात भी जांच के दौरान टीम के सामने आई। इसे लेकर सूत्र बताते हैं कि इसमें टीम ने लिखा पढ़ी भी कर ली है।

आंगनबाड़ी ने की पुष्टि
आंगनबाड़ी रामरती शर्मा ने भी जांच टीम को बताया कि स्क्रीनिंग वाले दिन सूरजपाल भर्ती कराने को तैयार थे, लेकिन टीम ने बेड खाली न होने की बात उनके सामने कही थी।

इस टीम ने की थी स्क्रीनिंग
अकराबाद के गांव सिंहपुर की डॉली पुत्री सूरजपाल की स्वास्थ्य जांच 20 नवंबर को अकराबाद ब्लॉक की आरबीएसके टीम बी ने की थी। मेडिकल अफसर डॉ. ज्ञानेश, डॉ. दीपिका और स्टाफ नर्स कल्पना टीम में थीं। इसी स्क्रीनिंग में डॉली कुपोषण के लाल घेरे से भी 31 फीसदी अधिक कुपोषित चिह्नित हुई थी।

टीम के मेडिकल अफसर का बयान
उपचार के बिना ही कुपोषित डॉली की मृत्यु मामले में स्क्रीनिंग वाले दिन ही भर्ती न कराने वाली आरबीएसके टीम के मेडिकल अफसर डॉ. ज्ञानेश ने अपने बयान में एसीएमओ को बताया कि स्क्रीनिंग वाले दिन डॉली के पिता सूरजपाल ने खुद भर्ती होने से मना किया था। कहा था कि तुरंत भर्ती होने के लिए उनकी कोई तैयारी नहीं है। फिर 3 दिसंबर को भी कॉल पर कहा कि दिल्ली में हैं। 26 दिसंबर को भी कॉल की तो बात नहीं हो पाई। जब 17 जनवरी को फिर कॉल की तब पता लगा कि डॉली अब नहीं रही। इस टीम ने 20 नवंबर से 17 जनवरी तक 7 कुपोषित डीईआईसी में उपचार के लिए पंजीकृत कराए हैं। इसमें एक बच्चा एनआरसी में भी भर्ती हुआ है।

डॉली का पिता सवा 2 लाख का कर्जदार हो गया
जांच करने गई टीम ने डॉली के परिवार की हैसियत का भी पूरा आकलन किया है। यह बात भी सामने आई कि डॉली का पिता सूरजपाल भूमिहीन है और सवा दो लाख रुपये का कर्जदार है। इसमें 60 हजार रुपये डॉली पर खर्च हूए और शेष 2 कमरों का घर बनाने में लगे। यह कर्ज 4 रुपये सैकड़ा की ब्याज पर लिया गया है। इसके अलावा 2 पड़िआ भी डॉली के जन्म के बाद के इलाज में बिक गईं। जांच में यह सवाल भी पूछा कि घर में कितना दूध आता है, डॉली की मां ने जवाब दिया डेढ़ किग्रा। जिसमें डॉली सहित 2 बच्चे दूध पीते थे। बाकी घर के शेष 3 लोगों और आगंतुकों की चाय में लग जाता। एकबारगी तो एसीएमओ भी बोल पड़े बेचारी दुख की मारी है।

रेफरल डे से सब परेशान
अलीगढ़। सभी 12 ब्लॉक पर तैनात 24 आरबीएसके टीमें स्थानीय सीएचसी अधीक्षकों के नियंत्रण में कार्यरत हैं। लापरवाही पर अधीक्षकों को इनका वेतन काटने का भी अधिकार है। अधीक्षकों का टीम पर दबाव रहता है कि स्क्रीनिंग रोज करें, लेकिन डीईआईसी और एनआरसी में भर्ती कराने का कार्य पूरे हफ्ते में सिर्फ शनिवार को ही करें। यह गाइडलाइन क्रॉस करने पर कई टीमों को चेतावनी भी दी जाती रही हैं। हालांकि इस गाइडलाइन से डीईआईसी, एनआरसी सहित खुद आरबीएसके टीम भी दुखी है, लेकिन आरबीएसके टीम का स्टाफ संविदा पर रखा गया है, विभाग की इस कमी को वे नौकरी जाने के डर से नहीं स्वीकार पाते। हालांकि कई बार विशेषज्ञों की मौजूदगी वाली बैठकों में टीम की स्वतंत्रता बढ़ाने की सिफारिशें की जाती हैं, लेकिन विभाग के माइक्रो प्लान में के तब्दीली नहीं हो सकी।
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मुझे कार्रवाई चाहिए, सूरजपाल
डॉली के पिता सूरजपाल के पहुंचने से पहले ही जांच टीम जा चुकी थी, लेकिन गांव पहुंचते ही सूरजपाल ने जांच अधिकारी व एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा को फोन किया। कहा, विजयगढ़ सीएचसी की नर्स, दाई और एएनएम को मैंने कर्जा करके 2 हजार रुपये दिए थे। 100 रुपये कम पड़ गए थे तो नर्स ने बहुत सुनाया था और पूरे 2 हजार ही लिए। दूसरी ओर मैंने उस दिन खुद कहा था टीम को कि आज ही भर्ती करा दो डॉली को, लेकिन उन्होंने बेड खाली न होने की बात कही थी। सूरजपाल ने एसीएमओ से स्पष्ट कहा कि इन दोषियों पर मुझे इसलिए कार्रवाई चाहिए, ताकि जो मुझसे भी गरीब हैं उनके साथ ये सब न दोहराया जाए।
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