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18 दिन से धरने पर बैठा छात्र भाषण के दौरान बेहोश होकर गिरा

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18 दिन से धरने पर बैठा छात्र भाषण के दौरान बेहोश होकर गिरा
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

एएमयू रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष भाषण खत्म करते ही छात्र शमीम बारी बेहोश होकर गिर पड़ा। इसकी वजह से वहां हड़कंप मच गया। आक्रोशित कुछ छात्र हंगामे पर उतारू हो गए, लेकिन धरना दे रहे छात्रों की सतर्कता से कोई अप्रिय घटना नहीं घट सकी।

यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार पीएचडी में दाखिला देने की मांग को लेकर पिछले 18 दिन से छात्र-छात्रा रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठे हैं। आंदोलित छात्र राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री, यूजीसी एवं महिला आयोग के अतिरिक्त कई बार कुलपति को भी पत्र लिख चुके है। सर्दी में दिन-रात धरने पर बैठने के कारण छात्र नेता कुंवर मुहम्मद अहमद एवं मो. इशाक सहित तीन छात्र बीमार होकर जेएन मेडिकल कॉलेज पहुुंच गए हैं। बुधवार को एएमयू छात्रों द्वारा धरनार्थियों की मांगों के समर्थन में मौलाना आजाद लाइब्रेरी से रजिस्ट्रार कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला गया। इसके साथ ही छात्र बाबरी मस्जिद के विध्वंस की बरसी को काला दिवस के रूप में मनाते हुए मार्च में शामिल हुए। वह अपने हाथों व सिर पर काली पट्टी बांधे हुए थे। इसमें एएमयू छात्र संघ का चुनाव लड़ रहे तमाम प्रमुख प्रत्याशी भी मौजूद थे। मार्च के बाद धरना पर बैठे छात्र शमीम बारी ने वहां मौजूद सैकड़ों छात्रों को संबोधित किया।
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उन्होंने इंतजामिया के खिलाफ तीव्र विरोध प्रकट करते हुए कहा कि कब तक हम पर जुल्म करोगे। सर्दी में पिछले 18 दिन से धरने पर बैठे हमारे तीन साथी अस्पताल में भर्ती हो गए हैं। 24 घंटे में जवाब नहीं मिला तो अब यहां से छात्र-छात्राओं की लाशें उठेंगी। भाषण खत्म होते ही शमीम बारी बेहोश होकर गिर पड़े। इसकी वजह से वहां हड़कंप मच गया। छात्र शमीम को उठाकर धरना पर लगे गद्दे पर लिटाया गया। कई छात्र इंतजामिया के सुस्त रवैये का विरोध करते हुए हंगामा करने पर उतारू हो गए। लेकिन धरना दे रहे छात्रों ने किसी तरह उन्हें रोका। आनन-फानन में एंबुलेंस बुला लिया गया, लेकिन छात्रों ने यह कहकर अस्पताल भेजने से मना कर दिया कि अब लाश उठेगी। हालांकि छात्रों ने पानी का छीटा मारा तो तब जाकर शमीम बारी होश में आए। छात्र नेता अब्दुल कबीर ताहिर ने कहा कि 24 घंटे में निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोग भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। अब यहां से उनका जनाजा उठेगा।
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धरना पर बैठे नेताओं की वजह से हंगामा टल गया
अलीगढ़। शमीम बारी की बेहोशी के बाद वहां मौजूद कई छात्र आक्रोशित हो गए और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर मुख्य गेट खोलने का दबाव बनाने लगे। भीड़ के साथ लड़के रजिस्ट्रार आफिस तक जाना चाहते थे। एएमयू कुलपति एवं प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। छात्रों में इसका भी आक्रोश था कि 18 दिन से धरना दे रहे छात्रों के पास एक बार भी कुलपति नहीं पहुंचे। माहौल नियंत्रण से बाहर होता, इससे पहले ही धरना दे रहे छात्रों ने माइक पर अपील की कि किसी तरह हिंसा या उपद्रव नहीं होना चाहिए। जो भी हमारे साथ है लोकतांत्रिक तरीके से चलें। किसी तरह का हंगामा नहीं करें। धरनार्थियों की सतर्कता से मामला बिगड़ने से बच गया।
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अधिकारियों ने बुलाकर की वार्ता
अलीगढ़। इस घटना के बाद जब भीड़ छट गई तो प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य पहुंचे और पीएचडी मामले के लिए गठित कमेटी के सदस्यों से बातचीत की पेशकश की। अब्दुल कबीर ताहिर, शमीम बारी, गुफरान, आमरीन, तलहा कमाल, सारा चौधरी, दरक्शा, सुहैल, इमरान आदि बातचीत के लिए गए। छात्रों का कहना है कि अधिकारी प्रेशर का हवाला देकर धरना खत्म करने का आग्रह कर रहे थे। लेकिन वे लोग धरना खत्म करने वाले नहीं है। इस संबंध में एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को लेकर बातचीत चल रही है।
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