प्रकृति में छिपे ऐसे सूक्ष्म सहयोगियों की पहचान हो रही है, जो बिना रसायनों के ही फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर नियंत्रण कर रहे हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जंतु विज्ञान विभाग ने पिछले करीब 15 वर्षों में 134 सूक्ष्म परजीवी कीटों की खोज की है, जो जैविक नियंत्रण एजेंट (बायोलॉजिकल कंट्रोल एजेंट) के रूप में काम करते हैं और खेती के लिए बेहद उपयोगी हैं। इन सूक्ष्म परजीवी कीटों की खासियत यह है कि ये फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों में विकसित होकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता।
देशभर में हुई खोज, वर्षों की मेहनत
एएमयू की यह खोज केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलीगढ़ के अलावा पश्चिम यूपी के कृषि प्रधान अन्य जिलों को शामिल किया गया। साथ ही जम्मू कश्मीर, बिहार, राजस्थान और हरियाणा में वर्ष 2011 से 2015 के बीच 31 और 2016 से 2024 के बीच 100 से अधिक सूक्ष्म परजीवी कीटों की पहचान की गई। इन्हें गोनासिरस मेघालयंस, कोसमोकोमाइडिया, काशीपुरेंनसिस, लारेटो, जोलेना, गीमा, कबाला, तलबा, जमीन जैसे नाम भी दिए गए। हाल ही में एक और सूक्ष्म परजीवी कीट की पहचान हुई जिसे माजूलिएंसिस नाम दिया गया। शोधकर्ताओं का दावा है कि जल्द ही कुछ और नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
. हमें अब तक 134 सूक्ष्म परजीवी कीट मिले हैं। इनकी गतिविधियों, विकास और आनुवंशिक संरचना पर अध्ययन कर रहे हैं। ये फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं। इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।
- प्रो. शाहिद बिन जिया, जंतु विज्ञान विभाग एएमयू