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Aligarh News: न फव्वारे चल रहे, न बोट...काई से पटा सरोवर

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अचल सरोवर के पानी में जमी काई।  - फोटो : samvad
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करोड़ों रुपये खर्च कर जिस अचल सरोवर को शहर की शान बनाने का दावा किया गया था, वही आज बदहाली की तस्वीर बन चुका है। 28 करोड़ रुपये के कायाकल्प के बाद भी हाल यह है कि न फव्वारे चल रहे हैं और न बोटिंग हो रही है। सरोवर का पानी काई से पटकर सड़ांध देने लगा है।
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शुक्रवार को जब सरोवर का दौरा किया तो पाया कि यहां जलीय जीवन मृत है। पानी में ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने और सफाई के लिए लाई गईं आधुनिक मशीनें केवल शोपीस हैं। नौका विहार के लिए आईं फाइबर की नावें पानी में उतरने से पहले ही टूट चुकी हैं। डेकोर लाइटें या तो उखड़ चुकी हैं या अंधेरे में गुम हैं। किनारे पर बनीं 32 दुकानें अब भी नीलामी के इंतजार में जर्जर हो रही हैं।

दरअसल शहर के बीचों-बीच स्थित इस पौराणिक स्थल के चारों ओर करीब 100 मंदिर हैं। इसलिए 2019 में इस धरोहर को जीवित रखने के लिए स्मार्ट सिटी से जोड़ा गया। इसके बाद राजकीय निर्माण निगम के जरिए शिव शक्ति एंटरप्राइजेस से निर्माण कार्य कराया गया।
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सरोवर के चारों ओर परिक्रमा के लिए ब्रिज बनाया। यज्ञ स्थल और तुलसी घाट बनाए गए। सरोवर के बीचोबीच एक ऊंची गुमटी (प्लेटफार्म) पर 20 फीट ऊंची भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित की गई ताकि इस स्थल को आकर्षण से जोड़ा जा सके। सवाल लाजमी है कि इनसब में 28 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सरोवर की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं, छतों का प्लास्टर झड़ रहा है और सीढ़ियां जर्जर होकर हादसों को न्योता दे रही हैं।

निगम से सहयोग नहीं मिला

जब बदहाली की इन तस्वीरों के बारे में शिव शक्ति एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रद्युम्न जादौन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सफाई तेजी से कराई जा रही है एक सप्ताह के भीतर इसे लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। नगर निगम के सहयोग न करने के कारण दिक्कत आई, लेकिन अब फर्म खुद तेजी से कार्य कर रही है।



सात दिन का दिया अल्टीमेटम

फर्म के दावे और अचल सरोवर की बदहाली के बारे में महापौर प्रशांत सिंघल से पूछा तो उन्होंने कहा कि नगर निगम ने जिम्मेदार फर्म को नोटिस दिया है। सात दिन के भीतर सरोवर का संचालन शुरू करना है। अगर ऐसा नहीं होता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय पार्षद अंशु अग्रवाल ने कुछ कारण बताए। उन्होंने कहा कि सरोवर के लिए टेंडर हो चुका है लेकिन खाने पीने के स्टाॅल नहीं बने हैं जिसकी वजह से यह शुरू नहीं हो पाया। सवाल अब भी जस का तस है कि सरोवर शुरू होने से पहले ही बदहाल कैसे हो गया? इसका कोई स्पष्ट जवाब न फर्म दे पा रही है, न ही जिम्मेदार अधिकारी।


ट्रीटमेंट प्लांट बंद, बारिश का पानी भी नहीं पहुंच रहा सरोवर तक
निर्माण के दौरान जल संरक्षण के लिए यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, ताकि बारिश का पानी साफ कर सरोवर में डाला जा सके और जल स्तर बना रहे, लेकिन हकीकत यह है कि प्लांट चालू ही नहीं हो सका। बारिश का पानी सीधे बहकर बर्बाद हो जाता है। नतीजतन, सरोवर सूखता जा रहा है और जल संरक्षण के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं।
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