न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
फिलिस्तीन पर इजरायली हमले के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विरोध मार्च का आयोजन किया गया। इसमें छात्र नेताओं ने शांति बहाली एवं अमन कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को आगे आने का आह्वान किया।
विरोध मार्च का आयोजन एएमयू छात्र संघ द्वारा किया गया था। छात्र मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास जमा हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए एएमयू सर्किल पहुंचे। छात्रों के हाथों में नारे लिखी तख्तियां थीं।
राजनीति विज्ञान के प्रो. अर्शी खान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि फिलिस्तीन पर भारत का नजरिया यह था कि महात्मा गांधी ने कहा था कि जिस तरह इंग्लैंड अंग्रेजी बोलने वालों का देश है, उसी तरह फिलिस्तीन फिलिस्तीनियों का देश है। फिलिस्तीन के लोग इजरायल के नाजायज कब्जे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
फिलिस्तीन की यह लड़ाई पिछले कई सालों से चली आ रही है। इस महीने लड़ाई में फिलिस्तीन के 60 नागरिक मारे जा चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में घायल हुए हैं। यह लोग पत्थर एवं टायर के सहारे अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि फिलिस्तीन की यह लड़ाई अस्तित्व की लड़ाई है। हम फिलिस्तीन में हो रहे कत्लेआम की मजम्मत करते हैं।
छात्र नेता हुजैफा आमिर रशादी ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में फिलिस्तीन के नागरिकों पर ग्रेनेड एवं बमबारी से हमला दर्शाता है कि दुनिया में इंसानियत खत्म हो चुकी है। मानवाधिकार आयोग एवं संयुक्त राष्ट्र संघ का वजूद खत्म कर देना चाहिए। ये लोग जुल्म पर खामोश हैं और तमाशा देख रहे हैं।
विरोध मार्च में सचिव मोहम्मद फहद, कैबिनेट मेंबर नजमुस साकिब, मतीन अशरफ, पूर्व छात्र संघ सचिव नबील उस्मानी आदि शामिल हुए।