सत्ता का मतलब-व्यवस्थाओं का मखौल उड़ाने की खुली छूट
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
कहते हैं कि सत्ता का नशा जब चढ़ता है तो आदमी को कुछ नहीं सूझता, वह ऐसा कर जाता है जिसकी उससे उम्मींद तक नहीं होती। कमोबेश ऐसा ही भाजपाइयों के साथ होता नजर आ रहा है।
केंद्र एवं राज्य में सत्ता के नशे में चूर भाजपाइयों ने निकाय चुनाव 2017 के नामांकन के दौरान ऐसी ही हरकत कर दी। कानून और व्यवस्थाओं की दुहाई देने वाले भाजपाई मेयर प्रत्याशी राजीव अग्रवाल के नामांकन के दौरान आचार संहिता को धता बताकर न केवल नामांकन कक्ष में घुस गए, बल्कि दोपहर तीन बजे तक वहीं जमे रहे। जाते-जाते भी कलेक्ट्रेट परिसर को जय श्री राम के नारों से गुंजायमान कर गए।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20-25 की संख्या में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को कक्ष से बाहर करने के लिए रिटर्निंग अफसर नगर निकाय एवं एडीएम वित्त बच्चू सिंह को स्वयं अपील करनी पड़ी।
परंतु उसका असर नहीं पड़ा। अपील के बाद कुछ नेता तो बाहर चले गए, लेकिन कुछ वहीं धूनी रमा कर बैठे रहे। कुछ बार-बार अंदर बाहर होते रहे। सत्ता की हनक से सहमे प्रशासनिक अफसर भी उस समय असहाय नजर आए। जाते-जाते भी भाजपाइयों ने सांसद, विधायक एवं अन्य गण्यमान्यों की मौजूदगी में जय श्री राम का नारा लगाकर आचार संहिता को खुली चुनौती देने में कसर नहीं छोड़ी।
कांग्रेसियों ने भी लांघी सीमाएं, न्यायालय के बाहर पीसी
मेयर पद के लिए नियत डीएम न्यायालय में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान अधिक संख्या में भाजपाइयों के घुसने से नाराज कांग्रेसियों ने भी सीमाएं लांघने में कसर नहीं छोड़ी।
पूर्व सांसद एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने तो बाकायदा मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को बुलाकर प्रशासन खासतौर पर एसपी सिटी पर सत्ता के दबाव में खुद आचार संहिता की धज्जियां उड़वाने के आरोप तक लगा डाले।
इस पर उनकी एसपी सिटी से तनातनी हो गई। पूर्व जिलाध्यक्ष गिरवर शर्मा ने भी प्रशासन पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब नामांकन में यह स्थिति है तो मतदान व मतगणना के दौरान की स्थिति का खुद अंदाजा लगाया जा सकता है।
कांग्रेसियों को भी किया कक्ष से बाहर
भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान पांच से अधिक संख्या में घुसे भाजपा नेताओं के प्रति नर्म रुख रखने वाले प्रशासनिक अफसरों के सुर मेयर पद के कांग्रेस प्रत्याशी मधुकर के नामांकन के दौरान एकाएक बदल गए।
नामांकन कक्ष में प्रत्याशी, जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक विवेक बंसल के साथ छह सात लोग आ जाने पर रिटर्निंग अफसर ने तत्काल टोक दिया। स्पष्ट कहा कि पांच से ज्यादा लोग कक्ष में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
यह बात दीगर है कि उस समय भाजपा प्रत्याशी राजीव अग्रवाल, पूर्व मेयर शकुंतला भारती समेत अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता भी न्यायालय में मौजूद थे। इस पर महानगर अध्यक्ष ने रिटर्निंग अफसर से प्रत्याशी समेत कुल अधिकृत संख्या पूछी और उसके बाद अन्य लोगाें को बाहर भेज दिया गया।
डीएम कक्ष बना भाजपा कार्यालय
मेयर प्रत्याशी के नामांकन के दौरान डीएम कार्यालय भाजपाइयों का अड्डा बन गया। हालांकि कक्ष में डीएम तो मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके प्रतिनिधि के तौर पर बैठे एसडीएम भाजपाइयों को देखकर बाहर जाने पर मजबूर हो गए।
महफिल जमी तो वहां भाजपा के कद्दावर नेता व एटा सांसद राजवीर सिंह राजू, सांसद सतीश गौतम, विधायक संजीव राजा, विधायक अनिल पाराशर, जिलाध्यक्ष देवराज सिंह, महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत समेत अन्य कद्दावरों की फौज जमा हो गई।
इस अनूठी महफिल के दौरान एक दूसरे से गिले शिकवे किए गए तो नामांकन के दौरान पार्टी प्रत्याशियों के जुलूस में मौजूद हुजूम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की होड़ मच गई।