एएमयू को ‘बिजली बिल’ का करंट
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को ‘बिजली बिल’ का करंट लगा है। मई 2017 बिजली बिल तीन करोड़ रुपये से अधिक आने के बाद खलबली मच गई है।
कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों, डीन्स एवं चेयरमैन आदि को खत लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि विश्वविद्यालय हर महीने बड़ी धनराशि (3 करोड़) वहन करने में समर्थ नहीं है।
बिजली बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश होनी चाहिए। पूर्व कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह के कार्यकाल में एएमयू को बिजली बिल के रूप में सालाना करीब 24 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे।
इसे कम करने के लिए एएमयू के 17 भवनों पर रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाए गए। दावा किया गया कि एएमयू को इससे सालाना 7 करोड़ रुपये की बचत होगी, लेकिन मई महीने का 3 करोड़ रुपये से अधिक का बिल आने के बाद एएमयू प्रशासन की योजनाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इस हिसाब से एएमयू का सालाना बिजली बिल 24 से बढ़कर 36 करोड़ के आसपास पहुंचने की आशंका है, जबकि एएमयू को रखरखाव के लिए सालाना 30 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं और अधिकतर धनराशि बिजली बिल के भुगतान में ही खत्म हो जाता है।
अन्य कार्य के लिए पैसे नहीं बचते। एएमयू पीआरओ ऑफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि कुलपति ने तमाम विभागों के हेड को बिजली बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने का निर्देश दिया है।
विश्वविद्यालय के कार्यालयों, विभागों से लेकर हॉल तक में बेवजह एसी, कंप्यूटर, हीटर, पंखा और बिजली आदि का इस्तेमाल न करने को निर्देशित किया गया है। नान टीचिंग स्टाफ को भी बेवजह बिजली की बर्बादी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है।
अखिलेश से कई बार मिले थे पूर्व वीसी
एएमयू को व्यवसायिक दर पर बिजली मिलती है। पूर्व कुलपति जमीरउद्दीन शाह कई बार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर व्यवसायिक के बदले घरेलू दर पर एएमयू को बिजली देने का आग्रह किया था।
बिजली बिल बढ़ने का एक प्रमुख कारण एसी एवं हीटर आदि है। एएमयू में चाय आदि बनाने के लिए हीटर का खूब प्रयोग किया जाता है। एसी, पंखा आदि का दुरुपयोग भी आम बात है।