स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टरों की भारी कमी है। सीएमओ के अधीन डॉक्टरों के 193 पद हैं। इनमें से 132 पद खाली हैं। यानी 61 डॉक्टरों के भरोसे लाखों की आबादी है। सीएमओ के अधीन जो 61 डॉक्टर काम कर रहे हैं, उसमें महिला डॉक्टरों की संख्या सिर्फ सात है। दूसरे पैथी के डॉक्टरों के सहारे स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी चल रही है।
वर्तमान व पूर्व की सरकारों ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त चल रहे डॉक्टरों के पदों को भरने पर ध्यान नहीं दिया। हां, ठेका-टेंडर में कमीशन वाले काम खूब हुए। सीएमओ कार्यालय से बार-बार डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन लखनऊ में बैठे आला अधिकारियों ने कभी ध्यान तक नहीं दिया। यही कारण है कि सीएमओ के अधीन 193 पदों में से करीब 132 खाली हैं। लाखों की आबादी 61 डॉक्टरों के जिम्मे है। इसी 61 डॉक्टर में स्वयं सीएमओ, तमाम एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ एवं अन्य स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी हैं, जो कभी मरीज को नहीं देखते।
इसके अतिरिक्त जिला एवं मंडल स्तरीय अस्पतालों में स्वीकृत 81 पदों में करीब 35 रिक्त हैं। पंडित दीनदयाल एवं मलखान सिंह जिला अस्पताल आदि बड़े अस्पताल 46 डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में महिला मरीजों को महिला डॉक्टर व स्टॉफ से दिखाने की जो बात की जा रही है, वह सिर्फ हवाई है। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि महिला वार्ड में महिला चिकित्सक नहीं दे पाए तो महिला नर्स डॉक्टर के साथ जाएगी।