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बीमारी बनकर बह रहा बरसाती नाला, जांच शुरू

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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लहटोई ड्रेन में बिना ट्रीट किये पानी छोड़े जाने से कई गांव के निवासियों का चैन छिन गया है। इसकी वजह से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गैर सरकारी संगठन स्मार्ट विलेज फाउंडेशन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत के बाद अधिकारी हरकत में आ गए है। अधिकारियों द्वारा कई स्थानों से पानी का नमूना जांच के लिए लिया गया है।

फाउंडेशन के प्रबंधक विपिन चौधरी का कहना है कि सपेरा भानपुर, किढारा, धमरपुरा, आजाद नगला, खेरूपुरा आदि गांवों के निवासी पिछले एक साल से भीषण दुर्गंध से परेशान है। साथा चीनी मिल अपने विषैले बहाव को बिना ट्रीटमेंट सीधे लहटोई ड्रेन में छोड़ रहा है।
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पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि इसके संपर्क में आने वाले जीव जंतु अकाल मौत की चपेट में आ जाते हैं। उनकी शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साथा चीनी मिल से सपेरा भानपुर तक नमूने भरकर जांच शुरू कर दी है। विपिन चौधरी का कहना है कि साथा चीनी मिल की ईटीपी यूनिट की क्षमता बेहद कम है।

नियमित बिजली न मिलने से वो भी नहीं चल पा रहा। ऐसे में मिल का 95 फीसदी विषैला प्रदूषक बिना ट्रीटमेंट इस नाले में पहुंच रहा है। आरोप है कि एक दर्जन किसानों की तो फसलें भी जल चुकी हैं। फाउंडेशन द्वारा मिल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने एवं ग्रामीणों को इस भीषण स्थित से निकालने की मांग कर रहे हैं।
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पूरा प्रकरण राज्य व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित एनजीटी के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजा गया है। क्षेत्रीय अधिकारी राम गोपाल ने अपनी टीम भेजकर साथा चीनी मिल से सपेरा भानपुर तक जांच के लिए नाले से 3 नमूने भरवा लिए हैं। 4 सेंपल नाले से सटे भूजल के भी लिए हैं। क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि नमूनों का विश्लेषण 4 दिन में पूरा हो जाएगा। जांच रिपोर्ट तैयार कर राज्य व केंद्रीय बोर्ड से गाइड लाइन लेकर कार्यवाही करेंगे।
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