न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़।
अमर उजाला और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों, महिलाओं, युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को जैविक खेती के गुर सिखाए गए। शनिवार को हुए ट्रेनिंग प्रोग्राम में किसानों को जैविक खेती से होने वाले फायदे एवं उसे करने की तरकीब किसानों के साथ वैज्ञानिकों ने साझा की।
केवीके के वैज्ञानिक डॉ. सुधीर सारस्वत ने किसानों को बताया कि केमिकल फर्टिलाइजर के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म हो रही है। मिट्टी में पाए जाने वाले 17 प्रकार के तत्वों का विनाश हो रहा है। इसके कारण फसलों की पैदावार पर असर पड़ रहा है, जिससे किसानों को खेती में नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए किसानों को जैविक खेती की ओर अग्रसर होना चाहिए।
जैविक खेती में 80 प्रतिशत कंपोस्ट खाद एवं 20 प्रतिशत उर्वरक का उपयोग करें। उर्वरक की यह मात्रा हर वर्ष कम होती जाती है और कंपोस्ट की मात्रा बढ़ती जाती है। इससे चार वर्ष में फसल सिर्फ कंपोस्ट खाद पर निर्भर हो जाएगी। सहायक उद्यान निरीक्षक रविंद्र राजपूत ने किसानों को बताया कि जैविक खेती करने से अच्छी किस्म की फसलें तैयार होती हैं।
जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसके साथ ही किसानों को जैविक खाद तैयार करने की विधि भी बताई गई। वैज्ञानिक डॉ. आरपी सिंह ने किसानों से कहा कि सरकार जैविक खेती को लेकर किसानों के लिए बेहद लाभदायक योजनाओं का संचालन कर रही है।
इसका लाभ किसानों को अवश्य लेना चाहिए। वहीं, फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अशरफ खान ने किसानों को जैविक खेती के दौरान फसलों के उत्पादन में आने वाली चुनौतियों और उनके निदान के बारे में जागरूक किया।