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बसों की छतों पर बैठकर बहने पहुंची मायके

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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रक्षाबंधन पर बहनों को उनके मायके पहुंचाने में परिवहन निगम एकदम फेल रहा। बसों की कमी के कारण बहनों को बसों की छतों पर बैठकर सफर करना पड़ा। कासगंज, एटा, हाथरस, नरोरा, अतरौली, आगरा एवं मथुरा रोड की सवारियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।

सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक तो यह हालात थे कि पूरा गांधी पार्क बस स्टैंड सवारियों से भरा हुआ जबकि यहां बसों का अभाव साफ दिखाई दे रहा था। कोई बस आती भी तो उस पर सवारियां टूट पड़ती।
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जिसको जहां से जहां मिलती वह वहीं से बस के अंदर घुसने की जद्दोजहद में जुट जाता। इसका परिणाम यह था कि भीड़-भाड़ और धक्का मुक्की के चलते कई लोग चुटैल हो गए। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।

प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर महिलाओं की फ्री यात्रा की घोषणा तो कर दी, लेकिन परिवहन निगम सरकार की मंशा के अनुरूप बसों की व्यवस्था करने में एकदम विफल साबित हुआ।

गांधी पार्क बस अड्डे पर सुबह से लेकर शाम तक बसों के अभाव के कारण यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। परेशान होने वाले में महिलाओं एवं बच्चों की संख्या अधिक थी।

चूंकि रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई के घर जाती है इसलिए महिलाओं को ही प्रदेश सरकार ने फ्री यात्रा की घोषणा की थी। यात्रियों का दबाव और बसों की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण महिलाओं को बसों की छतों पर बैठकर सफर करना पड़ा।

एसी बसें भी फंसी जाम में
आगरा जाने वाली एसी बस भी जाम में फंसने के कारण करीब दो घंटे देरी से चली। गांधी पार्क बस अड्डे से आगरा एवं नोएडा जाने वाली एसी बसें भी जाम में फंसी रही। निगम के कर्मचारियों ने बताया कि त्योहार पर सड़क के किनारे हवलाई समेत अन्य लोग टैंट लगाकर दुकान लगाते हैं। इसके कारण सड़क संकरी हो जाती है और जाम के हालात बन जाते हैं। यही कारण है कि जाम लग जाता है। यदि किसी से कुछ कहा जाता है तो सबसे पहला शिकार रोडवेज की बसें ही होती है। ऐसे में जाम खुलने का इंतजार करना ही उचित लगता है।
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रक्षाबंधन के कारण हर ओर जाम के हालात थे। जाम में बसों के फंसने के कारण कुछ परेशानी हुई, लेकिन यह समस्या ज्यादा देर तक नहीं रही। जैसे-जैसे बसें आ रही थी उन्हें तुरंत रवाना किया जा रहा था।
- अतुल त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक
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