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नगर आयुक्त के खिलाफ वाद दायर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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नगर निगम वर्कशाप के सामने ही सेना की निष्प्रयोज्य पड़ी जमीन पर कूड़ा घर बनाने, गंदगी फेंकने, कूड़ा जलाने और हजारों लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पहुंचाने के लिए नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ अदालत में वाद दायर किया गया है। इस मामले की 25 अगस्त को सुनवाई होनी है।

प्रतिभा कालोनी के पास न्यू राजेंद्र नगर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण तिवारी की ओर से अदालत में दायर किए वाद में कहा है कि नगर निगम वर्कशाप के सामने ही कूड़े का डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। जबकि यह भूमि सेना की है। यहां पर प्रतिभा कालोनी, राजेंद्र नगर कालोनी, न्यू राजेंद्र नगर कालोनी आदि आबादी रहती है जिसमें हजारों की संख्या में परिवार रहते हैं।
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नगर निगम के ट्रैक्टर यहां पर कूड़े के साथ ही मरे हुए जानवर और मांस आदि के अवशेष भी फेंक देते हैं जिससे भयंकर दुर्गंध उठती है। साथ ही हजारों परिवारों के लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है। यहां पर गंदगी के चलते कई बार लोगों को संक्रमण और संबंधित बीमारियां भी हुईं। कई बार ध्यान दिलाने और अधिकारियों से गुहार करने के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है।

प्रदेश सरकार को भी गलत आंकड़ेे प्रस्तुत कर स्मार्ट सिटी के संबंध में गुमराह किया गया। इसी तरह स्वच्छ भारत अभियान को भी पलीता लगाया जा रहा है। राम कृष्ण तिवारी ने बताया कि इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया है। इस मामले की सुनवाई 25 अगस्त को होनी है।

खतरनाक परिणाम हैं कूड़ा जलाने के
शहर में कूड़े से परेशान कुछ लोग कूड़ा जला देते हैं। इसमें प्लास्टिक और पालिथीन भी होती है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि जिस वक्त कूड़ा जलाया जाता है तो उसमें प्लास्टिक भी शामिल रहती है। उसके जलने से ऐसे केमिकल उत्सर्जित होते हैं जिससे बच्चों का मौलिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है। फेफड़ों को भी यह स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त करते हैं।

रहने योग्य नहीं है शहर की आब ओ हवा
कुछ दिन पहले सामाजिक संस्था उड़ान के डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा ने शहर के प्रदूषण के संबंध में आंकड़े जुटाए तो साफ हुआ कि शहर की हवा और पानी में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि उसे इंसान की सांसों के लिए स्वस्थ नहीं कहा जा सकता है। हवा में कार्बन मोनो आक्साइड सहित माइक्रोफाइन डस्ट पार्टिकलों की संख्या 10 गुना तक ज्यादा थी। इसी तरह जमीन के भीतर पानी में भी जहरीले तत्व पाए गए। इस पानी को बिना ट्रीटमेंट के पीना सेहत के लिए बेहद खतरनाक बताया गया।
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‘जिले में हरियाली का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। शहरी इलाके में कूड़े के निस्तारण में उदासीनता है। दावा करते हैं कि एटूजेड निस्तारण करती है लेकिन वह सिर्फ डंप ग्राउंड बनकर रह गया है। ऐसे में लगातार बढ़ रहा कूड़ा शहर के लिए चुनौती बन रहा है’
- सुबोध नंदन शर्मा, पर्यावरणविद्

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