न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सीबीआई की चार्जशीट के बाद अब स्पेशल कोर्ट ने भी अलीगढ़ निवासी आईपीएस देशराज सिंह को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया है। बुधवार को चंडीगढ़ में ये फैसला आने के बाद से देशराज बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि मेरे साथ घोर अन्याय हुआ है आज से मैं बौद्ध धर्म स्वीकारता हूं।
उन्होंने बुधवार शाम फेसबुक पर पोस्ट में कहा कि मैंने कभी रिश्वत न मांगी, न ली । फिर भी सजा हो गयी। पिछले छह साल मैंने भगवान से करुण पुकार की कि मेरी लाज रखना प्रभु। घोर अन्याय हुआ है मेरे साथ। जिसने जो जो कहा मैंने सब किया। जिस भगवान के दर्शन को बोला मैं मत्था टेक आया। पर मुझे न्याय नहीं मिला। आज से मैं बौद्ध धर्म स्वीकार करता हूं । क्योंकि केवल यही एक धर्म है जो सिद्धांत में बेकार के चोचले नहीं मानता।
चंडीगढ़ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें रिश्वत मांगने और लेने का दोषी ठहराया। उक्त घटना 6 वर्ष पूर्व की है। जवां के गांव सपेरा भानपुर निवासी 2008 बैच के आईपीएस अफसर देशराज सिंह तब चंडीगढ़ में एसपी सिटी थे। वहीं के सेक्टर 26 के इंस्पेक्टर अनोख सिंह की शिकायत पर 18 अक्टूबर 2012 को उन्हें 1 लाख रुपये रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
आरोप था कि एक जांच में फेवर करने के लिए देशराज ने इंस्पेक्टर अनोख सिंह से 2 लाख रुपये रिश्वत की डिमांड की थी। सीबीआई को साथ लेकर अनोख सिंह जब 1 लाख रुपये देशराज को आवास पर देने पहुंचे तभी सीबीआई ने देशराज को 1 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में करीब 2 माह देशराज जेल में रहे। 12 दिसंबर 2012 को जमानत पर रिहा हुए।
7 जुलाई 2013 को सीबीआई ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी, जबकि देशराज का कहना था कि इंस्पेक्टर एक सिपाही की जांच में सिफारिश करने उनसे मिलने आये थे। साथ ही रिश्वत से उन्होंने साफ इनकार किया था। कहा था कि इंस्पेक्टर जब उनके आवास पहुंचे तब वह दूसरे कमरे में थे। लेकिन सीबीआई ने रिश्वत पर लगे रंग का देशराज की उंगलियों पर मिलने को मजबूत आधार बताया। बहरहाल 8 अगस्त को इसी मामले में स्पेशल कोर्ट ने देशराज को रिश्वत का दोषी ठहरा दिया है।