12 साल से जिला पंचायत की राजनीति जयवीर की मुट्ठी में
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
पिछले 12 साल से जिला पंचायत की राजनीति पर पूर्व मंत्री एवं बसपा के दिग्गज नेता ठाकुर जयवीर सिंह का एक छत्र राज है। इसे वह किसी भी सूरत में हाथ से फिसलने देना नहीं चाहते हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह अचानक पाला बदलकर जयवीर सिंह ने अपने उन भाजपा विरोधियों की बोलती बंद कर दी है, जो जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज उनके भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू को पद से बेदखल कर उनकी ताकत को सीमित करने का प्रयास कर रहे थे। बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थामने को तैयार बैठे जयवीर के आने से जिले की राजनीति पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
ठाकुर जयवीर सिंह 2001 में जूपिटर लॉज में बसपा में शामिल हुए थे। 2002 में बरौली से विधायक एवं मायावती सरकार में वन मंत्री बने। 2004 में बसपा प्रत्याशी के रूप में लोकसभा का चुनाव भी लडे़, लेकिन कांग्रेस के चौधरी विजेंद्र सिंह से करीब साढ़े छह हजार वोट से हार गए। वर्ष 2000 में दिग्गज तेजवीर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे।
2005 में जिला पंचायत का अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। तेजवीर सिंह गुड्डू की पसंद एवं समीकरण को ध्वस्त कर जयवीर सिंह रामसखी कठेरिया को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे। इसके बाद जिला पंचायत की राजनीति पर अब तक उनका कब्जा है। 2010 में चौधरी सुधीर सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाकर जिले की राजनीति को अपनी मुट्ठी में रखा।
वर्ष 2015 में उन्होंने अपने भतीजे एवं जवां के ब्लॉक प्रमुख उपेंद्र सिंह नीटू को अध्यक्ष बनवाने में कामयाब रहे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। सपा विधायक राकेश सिंह की पत्नी डॉ. नीतू सिंह को बुरी तरह पराजित कर जिला पंचायत की राजनीति में अपनी धाक कायम रखने में जयवीर सफल रहे।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही जयवीर के विरोधी उनके पूर्व सहयोगी एवं जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह एवं कुछ अन्य लोगों को केंद्र में रखकर नीटू को हटाने का प्रयास कर रहे थे। एमएलसी पद से त्यागपत्र देकर तथा भाजपा में शामिल होने के संकेत देकर जयवीर सिंह ने बड़ा दांव खेला है। उनके खिलाफ मुहिम चलाने वाले भाजपा नेता चारों खाने चित नजर आ रहे हैं।
जयवीर का विरोध भी
बसपा नेता एवं पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के भाजपा में आने के संकेत के बाद जिले के नेता या तो मुंह नहीं खोल रहे हैं या खोल भी रहे हैं तो बड़ी सावधानी से। एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया का कहना है कि पार्टी का निर्णय मान्य होगा। जो भी फैसला लिया जाएगा पार्टी हित में होगा। सांसद से लेकर विधायक तक इस मामले में साफ-साफ बोलने से कतरा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो आरएसएस एवं उससे जुड़े कुछ नेता जरूर जयवीर को भाजपा में लाने के पक्ष में नहीं हैं। यह बात अंदर ही अंदर लखनऊ तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर तो कुछ भाजपा कार्यकर्ता खुलकर विरोध कर रहे हैं।