लोहे की रॉड से खुली इमरजेंसी खिड़की
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़
गत माह बरेली में रोडवेज की बस में आग लगने से हुई 22 लोगों की मौत के बाद भी परिवहन निगम नहीं जागा है। तभी को परिवहन निगम की बसों की इमरजेंसी खिड़की खोलने से कड़ी मेहनत करानी पड़ती है। तीन दिन पहले परिवहन मंत्री भी गोरखपुर में बस की इमरजेंसी खिड़की खोलने में असफल रहे।
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ ने गांधी पार्क बस अड्डे पर खड़ी रीजन की कई बसों के हालात देखे। बसों के हालात ही उसकी स्थिति को बयां कर रहे थे। संवाददाता ने जब बस में यात्रा कर रहे लोगों से खिड़की खोलने के लिए कहा तो उन्होंने काफी प्रयास किया, लेकिन खिड़की खोलने में सफलता नहीं मिली। कई बसों के चालक तो कैमरे को देख खिड़की खोलने के प्रयास में जुट गए लेकिन उन्हें भी काफी मेहनत करनी पड़ी।
आधा दर्जन से अधिक बसों की पड़ताल में बुद्ध विहार डिपो की बसों की हालत सबसे अधिक खराब थी। यहां तक कि बुद्ध विहार बस की आगरा-अलीगढ़ चलने वाली एसी बस की खिड़की खोलने में भी चालक को करीब चार मिनट का समय लग गया। हालांकि वह खिड़की खोलने में सफल रहा। अब विचारणीय प्रश्न उठता है कि यदि बस में आग लगने जैसी घटना हो जाए तो यात्री आखिर कैसे खिड़की खोलकर अपनी जान बचाएगा।
बाक्स
- बुद्ध विहार डिपो की बस संख्या यूपी 81बीटी 6850 बस की इमरजेंसी खिड़की को खोलने वाला हैंडिल गायब था, चालक को ही हैंडिल तलाशने में ही करीब पांच से छह मिनट का समय लग गया।
- बुद्ध विहार डिपो की बस संख्या यूपी 81 टी 3006 की खिड़की की चटकनी खोलने के लिए चालक को पेंचकस का सहारा लेना पड़ा। जब पेंचकस से भी सफलता नहीं मिली तो लोहे की रॉड से खिड़की को खोला गया।
- बुद्ध विहार की बस संख्या यूपी 81 एफ 2043 की खिड़की तो खुली पड़ी थी, चालक-परिचालक को इतना होश नहीं था उसे बंद कर दें, जबकि इस बस में यात्री भरे हुए थे और बस चलने को तैयार थी।
- बुद्ध विहार डिपो की अलीगढ़-आगरा चलने वाली एसी बस यूपी 81 बीटी 3205 की इमरजेंसी खिड़की का भी कुछ यही हाल था। पहले तो चालक खोलने को तैयार नहीं था, लेकिन कुछ समय बाद उसने खोलने का प्रयास किया, सीट में चटकनी अटकने के कारण उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी।
- हाथरस डिपो की बस संख्या यूपी 81 एएफ 3136 की भी कुछ यही स्थिति थी। चालक की कई मिनट की मशक्कत के बाद भी खिड़की खुल नहीं सकी।
-अलीगढ़ डिपो की बस संख्या यूपी 81 टी 2897 के चालक को तो खिड़की की चटकनी खोलने के लिए तो लोहे की रॉड का सहारा लेना पड़ा तब जाकर खिड़की खुली
वर्जन
सभी डिपो प्रभारियों से मेंटीनेस होने वाली गाड़ियों की लिस्ट मांगी है। चार्ज लेने के बाद ही बसों में कमियों को दूर करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। छत टपकने और इमरजेंसी खिड़की न खुलने की बसों की लिस्ट तैयार करने को कहा है।
संजीव कुमार यादव, सेवा प्रबंधक