न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने पादप संरक्षण और उसके सामाजिक आर्थिक प्रभाव की अहमियत को आज से लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ही पहचान लिया था, जब उन्होंने बंजर भूमि पर इस महान संस्थान की आधारशिला रखी थी।
उस समय उन्होंने इस क्षेत्र में व्यापक पौधारोपण के आदेश दिये और अपने हाथों से बरगद और पॉम के पेड़ लगाए जो आज भी संरक्षित हैं।
प्रो. तारिक मंसूर एएमयू के कृषि संकाय के प्लांट प्रोटेक्शन विभाग द्वारा भारतीय फाइटोपेथोलोजिकल सोसाइटी के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वह अनुसंधान और विकास रणनीति प्रबंधन पर कार्य करें ताकि उत्पादकता में सुधार के साथ प्रदूषण व जानवरों तथा रोगजनकों से खाद्य और औषधीय पौधों की रक्षा हो सके।
हैदराबाद यूनीवर्सिटी के कुलपति प्रो. अप्पा राव पोडिल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सतत रणनीति अपनाये जाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सह कुलपति प्रो. एमएच बेग, सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. आरएन पांडेय, सचिव डॉ. दिनेश सिंह, आयोजन अध्यक्ष प्रो. अख्तर हसीब, प्रो. परवेज कमर रिजवी, प्रो. सगीर अंसारी, प्रो. मुजीब उर रहमान खान आदि ने संबोधित किया।
प्रो. जयराजपुरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
कांफ्रेंस में एएमयू कृषि विज्ञान के पूर्व निदेशक प्रो. एम शमीम जयराजपुरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। जबकि प्रो. अबरार मुस्तफा मेमोरियल अवार्ड्स मऊ के डॉ. अनिल कुमार सक्सेना तथा 45 वर्ष से कम आयु वर्ग में करनाल के डॉ. प्रेमलाल कश्यप और आईएआरआई नई दिल्ली के डॉ. राशिद परवेज को प्रदान किये गये। डॉ. एमआर सिद्दीकी मेमोरियल अवार्ड लखनऊ के डॉ. राकेश पांडे को प्रदान किया गया।