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अब कैसे रोक लोगे डीएसओ साहब

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अब कैसे रोक लोगे डीएसओ साहब। यह चुनौती है राशन माफिया की। जिसका पूर्ति विभाग ही नहीं प्रशासन के पास भी कोई जवाब नहीं है। राशन का अनाज खुर्द बुर्द करने के मामलों में लगातार कार्रवाई से आजिज आए राशन माफिया ने कालाबाजारी के तौर तरीके बदल दिए हैं। अब वे राशन डीलर या गोदाम से अनाज के रूप में गेहूं व चावल लेने के बजाय सीधे उपभोक्ता से ज्यादा दाम चुकाकर इन खाद्यान्नों को ले रहे हैं। पूर्ति विभाग द्वारा कराई गई गुप्त पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है।

यह है कालाबाजारी का नया फंडा
राशन माफिया टिर्री चालकों के माध्यम से दो रुपये किलो गेहूं एवं तीन रुपये किलो राशन के चावल लेने वाले उपभोक्ताओं से घर-घर जाकर संपर्क करते हैं। उनसे आठ से दस रुपये किलो के रेट से यह अनाज खरीद लिया जाता है। आढ़तिये इन टिर्री चालकों से थोक में यह माल 17 से 18 रुपये किलो में खरीद कर अपने प्राइवेट गोदामों में स्टोर कर लेते हैं। यानी कि उपभोक्ता भी खुश, टिर्री चालक भी और आढ़ती भी मौज में।
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27 से 28 रुपये किलो में दिल्ली में सप्लाई
सूत्रों के मुताबिक आढ़तिया 17-18 रुपये किलो के हिसाब से खरीदे गए इस अनाज विशेष रूप से चावल को दिल्ली की मंडी में 27 से 28 रुपये किलो के रेट में बेच देते हैं। इस तरह करीब दस से बारह रुपये उनका मुनाफा हो जाता है और चेकिंग व कार्रवाई का डर भी नहीं रहता।
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टिर्री चालकों द्वारा ऊंचे दामों में उपभोक्ताओं से सीधे गेहूं व चावल की खरीद का मामला प्रकाश में आया है, लेकिन मुश्किल यह है कि ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई करना संभव नहीं है। -नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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