पार्सल के खेल में ऊपर नीचे सबका हिस्सा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
रोडवेज बसों में खुलेआम पार्सल पहुंचाने का खेल चल रहा है। चालक-परिचालक माल को एक-जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं। इसका कोई टिकट नहीं बनता।
बस रुपये सीधे जेब के अंदर। गुरुवार को अमर उजाला ने पार्सल के खेल की पड़ताल की तो हैरतअंगेज नतीजा सामने आया। मथुरा से अलीगढ़ के लिए चली अतरौली डिपो की बस में लक्ष्मीनगर (मथुरा) से चार बड़े पैकेट रखे गए।
इसकी सूचना रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक एवं मुख्यालय को फोन एवं वाट्स एप के जरिए पहुंची। रास्ते में हस्तपुर पर गाड़ी चेक भी हुई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
अतरौली डिपो की एक बस में गुरुवार को मथुरा के लक्ष्मीनगर तिराहे कुछ लोगों ने परिचालक से वार्ता की। कुछ रुपये लेने के बाद परिचालक ने ड्राइवर सीट के पीछे पैकेट रखवा दिए।
परिचालक व चालक ने यह जानना भी जरूरी न समझा कि इन पैकेट में क्या है? इन पैकेट के कारण यात्रियों को खड़े होने में दिक्कत हुई तो कुछ यात्रियों ने विरोध किया।
इस पर परिचालक ने धमकाकर चुप करा दिया। कुछ लोगों ने इसकी जानकारी वाट्स एप के जरिए क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी व मुख्यालय के चेकिंग दस्ते को दी।
साथ ही मोबाइल के जरिए भी दोनों को बताया। क्षेत्रीय प्रबंधक ने गाड़ी को चेक करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए। इगलास के बाद हस्तपुर चेकिंग प्वाइंट पर गाड़ी रोकी गई। एक टीआई गाड़ी के अंदर आए। यात्रियों की गिनती और नीचे उतर गए। उन्होंने लगेज को नोट तक नहीं किया।
बस में नहीं मिला कुछ
अतरौली डिपो के प्रभारी एआरएम राजेश कुमार यादव से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रबंधक के निर्देश पर गाड़ी हस्तपुर पर चेक हुई।
गाड़ी के अंदर कुछ नहीं था। इसके बाद गांधी पार्क बस अड्डे पर भी गाड़ी चेक हुई। जब उनसे कहा गया कि गाड़ी में पार्सल की पुख्ता सूचना यात्रियों ने दी थी।
मोबाइल रिकार्ड है तो उन्होंने चेकिंग टीम के पल्ले मामला डालते हुए फोन काट दिया। उधर गांधी पार्क बस स्टैंड प्रभारी ने बताया कि बस स्टैंड पर इस तरह की कोई चेकिंग नहीं हुई और न ही उन्हें चेकिंग का अधिकार है।