जिला पंचायत की बहुप्रतीक्षित बोर्ड बैठक आज
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
जिला पंचायत की बहुप्रतीक्षित बोर्ड बैठक शनिवार को मध्याह्न 12 बजे से जिला पंचायत के पंत सभागार में होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सांसद, विधायक, ब्लाक प्रमुख समेत अन्य लोगों की मौजूदगी में वर्ष 2017-18 की 334.76 करोड़ की जिला योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। योजना पर अंतिम मोहर 30 जून को दोपहर 12 बजे से कलक्ट्रेट सभागार में जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा लगाएंगे।
पहले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता और उसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू की कुर्सी पर छाए अविश्वास प्रस्ताव के बादलों की छांव में 17 जनवरी 2017 तक पास होेेेने वाली जिला योजना अब तक लटकी हुई है। आशंका जताई जा रही थी कि यदि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो जिला योजना फिर लटक सकती है। लेकिन डीएम के सख्त रुख के बाद योजना के पास होने को लेकर सभी आशंकाओं को पूर्ण विराम लग गया है। अब शनिवार को 334.76 करोड़ की बहु प्रतीक्षित जिला योजना के पास होने के आसार हैं। पास होने के बाद इसे 30 जून को आ रहे प्रभारी मंत्री सुरेश राणा के समक्ष रखकर अनुमोदन कराया जाएगा।
तो सरकार को देने होंगे तीन के बजाय छह अरब
अलीगढ़। शासन ने इस बार जिले को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए ग्राम, क्षेत्र व नगर पंचायतों को ज्यादा से ज्यादा प्रस्ताव जिला योजना में देने को कहा था तो सरकारी महकमों को वर्तमान योजनाओं के साथ बजट के अभाव में रुके विकास कार्यों के प्रस्ताव भी योजना में शामिल करने के निर्देश दिए थे।
इन निर्देशों से उत्साहित ग्राम व क्षेत्र पंचायतों ने विकास कार्यों के लिए 5.20 अरब के प्रस्ताव भेज डाले। दूसरी ओर नगर पंचायत एवं सरकारी महकमे भी पीछे नहीं रहे। इनकी तरफ से एक अरब से ज्यादा के प्रस्ताव आ गए हैं। अकेले समाज कल्याण विभाग ने ही 45 करोड़ का भारी भरकम बजट मांगा है। सिंचाई, विद्युत, शिक्षा, चिकित्सा के साथ मनरेगा समेत केंद्र की स्कीमों के लिए मांगा गया बजट भी इसी में शामिल है। ऊपर से जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव भी बजट की बाट जोह रहे हैं। नियमानुसार तय बजट 334.76 करोड़ से ज्यादा का बजट मिल नहीं सकता।
केंद्र की मनरेगा समेत आधा दर्जन से अधिक योजनाओं में कटौती की नहीं जा सकती। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से प्रस्तावों को हरी झंडी मिलती है और कौन से प्रस्ताव नेपथ्य में चले जाते हैं। फिलहाल तो प्रस्तावों की बाढ़ सरकारी महकमों के अफसरों की सिरदर्दी बढ़ाए हुए हैं।