जेल से पेशेवर अपराध संचालित करने वाले बदमाशों पर लगाम कसने के लिए कारागार प्रशासन द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में अलीगढ़ जेल में 12 जैमर लगाकर बंदियों के लिए नई निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। इससे जेल में मोबाइल सहित अन्य इलेक्ट्रानिक सर्विलांस सिस्टम चला पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगा।
बजट मंजूरी के बाद इंजीनियरों की टीम ने यहां आकर डेरा डाल लिया है और काम भी शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि इस माह के अंत तक जैमर काम करना शुरू कर देंगे। यूपी की जेलों में पिछले कुछ सालों में ऐसी वारदातें हुई हैं, जिनकी वजह से कानून व्यवस्था और जेलों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ।
इनमें पश्चिमी यूपी के मथुरा जेल में हाथरस के चर्चित अपराधी राजेश शर्मा उर्फ टोंटा पर हमला व एक हत्या होना प्रमुख घटना रही। इसके अलावा पूर्वांचल की कई जेलों में भी बड़े उपद्रव हुए। कई जगह मोबाइल भी मिले। इन प्रमुख वारदातों के बाद जेलों में जैमर की जरूरत पर सर्वे कराया गया।
इसी सर्वे के तहत अलीगढ़ जेल में 12 जैमर लगना तय हुआ। प्रत्येक आहते पर एक, दफ्तरी और मध्य जेल सहित कुल 12 जैमर लगेंगे और इनका नियंत्रण तीन टावरों से होगा। प्रत्येक जैमर पर जरूरत के लिए एसी भी लगाया जाएगा।
जेल से बाहर भी पड़ सकता असर
वरिष्ठ कारागार अधीक्षक डॉ.वीरेश राज शर्मा बताते हैं कि यह जैमर 300 मीटर रेडियस में मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस नहीं चलने देंगे। हालांकि हमारा मकसद जेल के अंदर निगरानी का है। इसलिए इंजीनियरों से कहा गया है कि इनकी फ्रीक्वेंसी कुछ इस तरह से सैट की जाए कि जेल के बाहर की आबादी क्षेत्र में इसका प्रभाव न पड़े। अगर ऐसा हुआ तो हम लोगों के आवासों में भी नेटवर्क समस्या होगी। इंजीनियरों ने पहले से इस समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया है। बाकी परीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
16 नए आवास भी मांगे कारागार प्रशासन ने
कारागार प्रशासन की एक बैठक शनिवार को लखनऊ में हुई। इसमें बजट व निर्माण संबंधी कार्यों पर चर्चा हुई। इस बैठक में वरिष्ठ अधीक्षक कारागार डॉ.वीरेश राज ने अलीगढ़ जेल के बंदी रक्षकों के लिए 16 नए आवास मांगे हैं। जिस पर जल्द बजट मंजूरी के संकेत मिले हैं। यहां अभी तक 87 सरकारी आवास उपलब्ध हैं।