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वीमेंस स्टडी सेंटर में राष्ट्रीय गोष्ठी

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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
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एएमयू के सेंटर फार वीमेंस स्टडीज के तत्वाधान में ‘पिछड़े समाज की महिलाओं का पिछड़ापन और उनकी समस्याओं का समाधान’ विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि केन्द्र की पूर्व निदेशक प्रो. जकिया अथर सिद्दीकी ने कहा कि पिछड़े और उपेक्षित समाज की महिलाओं के लिये सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह समानता और इंसाफ पर आधारित अपने अधिकारों को समझें। उन्होंने कहा कि देश और समाज के विकास के लिये आवश्यक है कि लैंगिक समानता, महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके अधिकारों की प्राप्ति और गरीबी को समाप्त करने पर तवज्जो दी जाए, क्योंकि इसी से आर्थिक और समाजिक विकास की उत्पन्न होती है।
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सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित वकील निजाम पाशा ने कहा कि जाति व्यवस्था, धर्म तथा वर्ग विभाजन अपनी जगह है और हर समाज में महिलाओं की स्थिति लगभग एक जैसी है। पाशा ने ‘मीटू’ आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आंदोलन अभी तक सिर्फ समाज के एक विशेष वर्ग तक ही सीमित है जबकि हर वर्ग में इस आंदोलन को फैलना चाहिये। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यौन शोषण से संबधित कानून के विषय में जनता में जागरूकता लाई जाए और शोषण का शिकार महिलाओं को त्वरित न्याय देने के लिये विशेष अदालतें स्थापित की जानी चाहिये।
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सोशल साइंस संकाय के डीन प्रो. अकबर हुसैन ने कहा कि किसी भी समाज में जनता का कल्याण उस समय तक संभव नहीं है जब तक कि उस समाज की महिलाओं की स्थिति सम्मान जनक न हो। उन्होंने कहा कि वैचारिक दृष्टि से सुदृढ़ महिलाऐं अपने सामाजिक सम्बन्धों को भलिभांति निभाती हैं। इस अवसर पर वीमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. नईमा गुलरेज ने भी संबोधित किया। डॉ. जूही गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। केन्द्र की निदेशक प्रो. अजरा मूसवी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। सारा किदवई ने संचालन किया।
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