न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। इस विश्वविद्यालय की शोहरत पूरी दुनिया में है।
वे बुधवार को यहां आयोजित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के 65 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। सर्वाधिक मेडल हासिल करने वाले हर्ष गुप्ता एवं सना को राष्ट्रपति ने अपने हाथों से मेडल पहनाए। अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिसर के एथलेटिक्स ग्राउंड में यह समारोह संपन्न हुआ।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि एएमयू देश के विकास में अपनी खास भूमिका निभाती रही है और सन 2020 में अपने सौ साल पूरे करने जा रही है। 20 वीं सदी के शरुआती दौर में हमारी आजादी की लड़ाई जोरों पर थी।
उस दौर में इंसान की बेहतरी और तरक्की के लिए तालीम की बुनियादी अहमियत पर जोर देने वाले महापुरुषों ने भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की। उसी दौर में बीएचयू, एएमयू, जामिया मिलिया इस्लामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई।
आधुनिक नजरिए के साथ ज्ञान-विज्ञान की नई संभावनाओं की तलाश करने वाली पीढ़ियों का निर्माण करना इन संस्थाओं का उद्देश्य था। साथ ही इसकी स्थापना ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के लिए की गयी थी जो अपने देश की साझा संस्कृति तथा नैतिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर गर्व का अनुभव करें।
यह गौर तलब है कि एएमयू के लिए आर्थिक सहायता देने वालों में बनारस के महाराजा भी शामिल थे। इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां में अपनी पहचान बनाई है।
वे एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों की सरकारों में प्रमुख पदों पर रहे हैं। मैं पिछले साल इथियोपिया के दौरे पर गया था। वहां के प्रधानमंत्री की पत्नी रोमन टेसफाये ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वे एएमयू की छात्रा रही हैं। मेरे पूर्ववर्ती डॉ. जाकिर हुसैन ने यहां शिक्षा प्राप्त की, स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और यहां वाइस चांसलर भी रहे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आपकी यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में इतनी शोहरत रही है कि महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने अपने शिष्य डॉ. रूडोल्फ सैम्यूएल की प्रशंसा करते हुए उन्हें यहां बतौर अध्यापक नियुक्त करने के लिए सुझाव दिया था। उनके सुझाव पर वे फिजिक्स डिपार्टमेंट में नियुक्त किए गए।
इस यूनिवर्सिटी की विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आप सब की है और मुझे विश्वास है कि आप ऐसा करेंगे। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन एवं कार्यों का उल्लेख करते हुए वंचित तबकों की बेहतरी के लिए कार्य करने का आह्वान किया। कहा कि यह खुशी की बात है कि इस यूनिवर्सिटी में साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए काम किए जा रहे हैं।
मुझे बताया गया है कि यहां एक ‘सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च इन इलेक्ट्रिफाइड ट्रांसपोर्टेशन’ की शुरुआत की गई है, जिसमें भारत सरकार और इंडस्ट्री के साथ संपर्क बनाकर उपयोगी टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़ा अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों को यूनिवर्सिटी के अन्य विभागों में भी बढ़ाने की जरूरत है ताकि बदलती हुई जरूरतों और माहौल के अनुसार नॉलेज क्रिएशन हो सके। आधुनिकता के लिए विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ प्रगतिशील सोच भी जरूरी है।
राज्यपाल राम नाईक ने 56 प्रतिशत पदक जीतने पर छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि देश में इस बात पर चर्चा हो रही थी कि महिलाओं को फाइटर प्लेन चलाना चाहिए या नहीं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महिला को रक्षा मंत्री बना दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि किसी भी इंसान के जीवन में दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। पढ़ाई समाप्त होती है और जीवन की लड़ाई प्रारंभ होती है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि जीवन में कभी असफलता मिले तो आंखें बंद कर आत्म निरीक्षण करें। जीवन में कभी हार मत मानना। सफलता आपके कदम चूमेंगी।
इससे पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने राष्ट्रपति एवं विजिटर रामनाथ कोविंद एवं राज्यपाल तथा चीफ रेक्टर राम नाईक को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। वार्षिक रिपोर्ट के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रपति को यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों एवं योजनाओं से अवगत कराया। मंच पर प्रो चांसलर नवाब इब्ने सईद छतारी, ऑनरेरी ट्रेजरार प्रो. हबीबुर्रहमान, रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर एवं कंट्रोलर प्रो. एम जुबैरी मौजूद थे।
छात्राओं ने मारी बाजी
इस समारोह में 218 में से 122 स्वर्ण पदक पर कब्जा कर छात्राएं छा गईं। 5488 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिसमें 2944 स्नातक, 2137 स्नातकोत्तर, 22 एमफिल एवं 385 पीएचडी के छात्र-छात्रा शामिल हैं।