एक करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से धनीपुर में फल मंडी बनकर तैयार हो चुकी है। अब उसे आढ़तियों का इंतजार है लेकिन आढ़ती हैं कि आने को तैयार नहीं हैं। इसका पुख्ता सबूत दुकानों की नीलामी प्रक्रिया है। दो बार नीलामी प्रक्रिया के बावजूद नाममात्र के आढ़तियों के आने के कारण नीलामी रद्द हो चुकी है। अब 15 फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में नीलामी प्रक्रिया होगी।
इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरअसल, सारसौल में वर्षों पुरानी फल मंडी है। निजी स्थान पर चल रही इस फल मंडी में एक वर्ग विशेष से जुड़े कुछ लोगों का ही कब्जा है। चाहें फलों की आमद हो, या फिर रेट, सभी में उनका राज है। इस सिंडीकेट को तोड़ने एवं महानगर में अनाज एवं फल मंडी को एक साथ करने की मांग वर्षों पुरानी है।
हाल ही में विधायक कोल अनिल पाराशर के प्रयासों से शासन ने यह मामला संज्ञान में लेते हुए धनीपुर मंडी में ही फल मंडी की स्थापना करा दी। डीडीसी मंडी ने बताया कि करीब सात एकड़ में बनी फल मंडी का कार्यालय से लेकर 40 दुकानों एवं सड़क आदि का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
आढ़ती नहीं चाहते जगह परिवर्तन
अलीगढ़। धनीपुर में बनी फल मंडी की दुकानों के लिए दो बार नीलामी प्रक्रिया हो चुकी है। पहले 29 जनवरी को और उसके बाद छह फरवरी को यह प्रक्रिया हुई। लेकिन चंद लोगों को छोड़कर कोई भी नहीं आया।
इसका कारण यह बताया जा रहा है कि वर्ग विशेष से जुड़े कुछ बड़े फल आढ़ती एवं ठेकेदार अपनी परंपरागत जगह सारसौल मंडी को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनके असर के कारण आम व्यापारी भी नीलामी प्रक्रिया में नहीं पहुंच रहा है।
धनीपुर मंडी में 1.60 करोड़ की लागत से फल मंडी बनकर तैयार हो चुकी है। लेकिन आढ़ती इसमें दुकानें लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दो बार नीलामी प्रक्रिया में चंद लोगों को छोड़कर कोई नहीं आया। नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया में कम से कम एक सैकड़ा से अधिक लोगों को होना चाहिए। अब 15 फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में नीलामी है।
नलिनी कांत सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट एवं प्रभारी मंडी