फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फार्म मशीनरी बैंक योजना में किसान को मिला धोखा

विज्ञापन
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
विज्ञापन


नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एंड टेकभनोलाजी योजना में फार्म मशीनरी बैंक योजना में चयन के बाद ट्रैक्टर, रोटावेटर एवं हैप्पी शीडर की खरीद के बाद बैंक से भुगतान में देरी कृषक समूह को भारी पड़ गई। देरी से आए बिलों को कृषि विभाग ने स्वीकृत नहीं किया। इससे अनुदान अटक गया। ऊपर से खरीद पर 12.50 प्रतिशत की ब्याज ने समूह से जुड़े किसानों की समस्या बढ़ा दी है। इस मामले में किसानों ने डीएम से मुलाकात कर शिकायत की है।

समूह के अध्यक्ष गांव कलाई निवासी गोपाल शर्मा पुत्र श्रीदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि बिल लेने के ऐवज में उससे सुविधा शुल्क की भी मांग की गई। न देने पर अब तक अनुदान लटका हुआ है। नौ लाख के लोन पर उसे प्रति वर्ष 12.50 प्रतिशत की अलग से ब्याज देनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल स्वीकृत करने की एवज में कृषि अफसरों द्वारा सुविधा शुल्क की मांग की जा रही है। सुविधा शुल्क न देने पर अनुदान लटकाया जा रहा है। इस मामले में डीएम ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
विज्ञापन


यह है मामला
कृषि यंत्रीकरण योजना में आन लाइन पंजीकरण कराने पर पहले आओ पहले पाओ के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एंड टेकभनोलाजी योजना के लिए श्रीदेव कृषक स्वयं सहायता समूह कलाई का चयन किया गया था। इस योजना में फार्म मशीनरी बैंक पर अनुदान के लिए लाभार्थी कृषक समूहों को दस लाख रुपये तक के कृषि यंत्रों पर एक लाख रुपया मार्जिन मनी जमा करने पर शेष नौ लाख रुपया बैंक द्वारा उपलब्ध कराया जाना था।

इसमें से आठ लाख रुपया अथवा 80 फीसदी क्रेडिट लिंक बैंक एंडेड सब्सिडी द्वारा सरकार से अनुदान में मिलना था। समूह को प्रभावी रूप से मात्र एक लाख का ही लोन निर्धारित अवधि में बैंक को वापस करना था। स्वयं सहायता समूह से जुड़े कृषकों का आरोप है कि उन्होंने योजना में सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर बैंक से नौ लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। आठ फरवरी 2018 को बैंक द्वारा स्वीकृति पत्र मिलने पर उन्होंने सोनालिका ट्रैक्टर, रोटावेटर, हैप्पी सीडर आदि कृषि यंत्रों का क्रय कर लिया।
विज्ञापन


इसका स्थलीय सत्यापन उप संभागीय कृषि अधिकारी कोल डा.निधि राठौर एवं सहायक कमल सिंह द्वारा मेरे खेत पर किया गया। फोटोग्राफ भी लिये गए। इन यंत्रों की कुछ धनराशि फर्मों को एडवांस में दी गई, लेकिन बैंक द्वारा फर्मों को शेष भुगतान देने में विलंब के चलते समय पर कृषि विभाग को खरीदे गए कृषि यंत्रों के बिल नहीं दिए जा सके। देरी से मिले भुगतान के बाद जब बिल प्रस्तुत किये गए तो कृषि विभाग ने उन्हें लेने से इंकार कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें