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विश्वविद्यालय को नहीं बांध सकते भौगोलिक सीमा में

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि विश्वविद्यालय विचारों से बनता है। इसलिए इसे भौगोलिक सीमा में नहीं बांध सकते। वैचारिक स्तर पर धर्म, राष्ट्रवाद सहित सभी विषयों पर प्रश्न उठना चाहिए और उसका उत्तर, प्रतिउत्तर और वाद-विवाद होेते रहना चाहिए। यहीं विश्वविद्यालय की जान हैं।


प्रो. अपूर्वानंद एएमयू छात्र संघ द्वारा कैनेडी लॉन में ‘द आइडिया ऑफ ए यूनिवर्सिटी’ विषय पर आयोजित परिचर्या को संबोधित कर रहे थे। दरअसल ‘द आइडिया ऑफ ए यूनिवर्सिटी’ नामक पुस्तक में देश विदेश के विद्वानों के लेखों को शामिल किया गया है। भारत एवं दूसरे देशों के विश्वविद्यालयों पर जो संकट है, उन पर बात की गई। विश्वविद्यालय पर आर्थिक उदारीकरण के प्रभाव पर भी चर्चा हुई।
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प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि दुनिया में कहीं भी किसी भी विश्वविद्यालय पर संकट आता है तो हर विश्वविद्यालय को चिंतित होना चाहिए और उस चिंता को प्रकट भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समाज का निर्माण कैसे होगा, इस पर विश्वविद्यालय को सोचना चाहिए और परिसर के अंदर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जो बाहर के लिए मॉडल बन सकें। एएमयू के इतिहास विभाग के प्रो. मोहम्मद सज्जाद ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ एएमयू पर अटैक किया जा रहा है। जेएनयू, डीयू, हैदराबाद सहित देश के टॉप संस्थानों पर भी राजसत्ता का हमला हुआ है। एएमयू में अटैक का एक और कारण है और वह है वोटों का ध्रुवीकरण कर चुनाव में फायदा उठाना। कार्यक्रम में छात्र संघ सचिव हुजैफा आमिर सहित छात्र एवं शिक्षक मौजूद थे।


एफआईआर दर्ज नहीं होता है तो कोर्ट में जाए एएमयू
एएमयू छात्र संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 12 फरवरी को हुए बवाल को लेकर सवाल खड़े किए गए। एएमयू के इतिहास विभाग के प्रो. मोहम्मद सज्जाद ने छात्र संघ, अमुटा एवं विश्वविद्यालय प्रशासन पर एक के बाद एक कई सवाल दागे। उनका कहना था कि यूनिवर्सिटी सर्किल से बाब-ए-सैयद तक पुलिस संरक्षण में भीड़ चली आती है। विश्वविद्यालय की ओर से इसे क्यों नहीं प्रमुखता से उठाया जाता।
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जो मोटर साइकिलें जली हैं, यह क्यों नहीं बताया जाता है कि वह छात्र हैं या बाहरी। कहां से आया था और क्यों आया था। यह यक्ष प्रश्न है और इसका जवाब मिलना चाहिए। भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह एवं अजय सिंह के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हुई। पुलिस एफआईआर नहीं कर रही है तो एएमयू प्रशासन न्यायालय में क्यों नहीं गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमुटा के प्रस्ताव में अजय सिंह एवं मुकेश सिंह का नाम क्यों नहीं लिया गया।
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