विलासिता पर बढ़ा खर्चा, पोषण पर सिर्फ चर्चा
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
सामाजिक संस्था उड़ान और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा समाज में पोषण की आवश्यकताओं और विलासिता के मद में किए जाने वाले खर्च को लेकर एक सर्वे किया गया। जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। करीब 100 लोगों के सैंपल पर किए सर्वेक्षण में पाया गया कि पोषण देने वाला देशी घी, जिसको कि एक सामान्य परिवार महीने में एक से डेढ़ किलो तक खर्च करता है, उसकी कीमत 450 रुपये से 600 रुपये प्रति किलो है।
जबकि सिर्फ आमोद प्रमोद और विलासिता के लिए उपयोग किए जाने वाली अंग्रेजी शराब की इतनी ही मात्रा की कीमत 800 रुपये से 1500 रुपये, वह भी चार दिन के लिए होती है। हैरत की बात यह रही कि परिवार में देशी घी की तुलना में शराब की खपत 10 से 15 गुना तक अधिक पाई गई। अब संस्था यह आंकड़े केंद्रीय गृह मंत्रालय और नगरीय विकास मंत्रालय को भेजने की तैयारी कर रही है। जिससे समाज की जीवन शैली और खान पान संबंधी व्यवहार में आए हुए बदलावों से सरकारों को भी अवगत कराया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों प्रकार की खानपान के तरीकों के स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर अपनी रिपोर्ट दी है।
‘पोषण किसी भी व्यक्ति और परिवार की प्राथमिकता है। देशी घी इसका प्रमुख स्रोत है। लेकिन देखने में आ रहा है कि देशी घी से भी ज्यादा महंगी शराब का प्रयोग रोजाना करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। जबकि पोषण संबंधी आवश्यकताओं की जरूरत पूरी करने वाली वस्तु उससे कहीं ज्यादा सस्ती है, जबकि उसका उपयोग उस मात्रा में नहीं हो रहा है। इसमें फलों का उपयोग भी शामिल है’
- डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, वरिष्ठ समाज विज्ञानी
‘पोषण बहुत जरूरी है। जबकि विलासिता आवश्यकता की श्रेणी में नहीं है। इस अध्ययन में हमने यह देखा कि दोनों प्रकार की आवश्यकताओं के लिए दृष्टिकोण में क्या बदलाव आ रहा है। स्वस्थ समाज में खान पान संबंधी आदतें भी अहम स्थान रखती हैं। कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो दोनों प्रकार की अवश्यकताओं में संतुलन रखते हैं’
- डॉ. गीता प्रधान, अपर निदेशक स्वास्थ्य