बन्ना देवी थाना क्षेत्र में एक मूकबधिर किशोरी के साथ वर्षों तक यौन शोषण करने के मामले में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अभिषेक कुमार बगड़िया की अदालत ने पीड़िता के रिश्ते के भाई को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोषी को 10 साल के कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पीड़िता के पिता प्रतिष्ठित व्यापारी हैं। वर्ष 2013 में उन्होंने अपने व्यापार में सहयोग के लिए परिवार के ही युवक को अपने यहां काम पर रखा था। व्यापारी की 17 वर्षीय बड़ी बेटी जन्म से बोल और सुन नहीं सकती है।
आरोप था कि युवक ने इस पारिवारिक भरोसे का फायदा उठाते हुए लगभग छह से सात साल तक मूकबधिर किशोरी का लगातार यौन शोषण किया और कई बार दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। लगातार हो रहे जुल्म के कारण पिछले दो साल से किशोरी गहरे अवसाद में रहने लगी थी।
इस बीच जब आरोपी को देखते ही किशोरी बुरी तरह डर जाती थी तो परिजनों को उस पर संदेह हुआ। इसके बाद व्यापारी ने उसे काम से हटा दिया और घर आने पर भी रोक लगा दी। जब मां ने बेटी से इशारों में उसकी परेशानी की वजह पूछी, तो उसने दिल दहला देने वाली सच्चाई बयां की। पीड़िता ने इशारों में ही अपनी दास्तां बताते हुए यहां तक कह दिया कि वह इस प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करना चाहती थी।
विशेष ट्रांसलेटर की ली गई मदद
परिवार की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर हिमांशु को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और मामले में मजबूत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मूकबधिर पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए एक विशेष ट्रांसलेटर (विशेषज्ञ) की मदद ली गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को पुनः जेल भेज दिया गया है।