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वेबसाइट पर खुलेआम बिक रहा 'अखिलेश लैपटॉप'

Sat, 02 Nov 2013 09:33 AM IST
अमर उजाला, बरेली
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एक ओर युवाओं को लैपटॉप से लैस करने में मुख्यमंत्री अखिलेश लगे है। वहीं दूसरी ओर उनके समाजवादी लैपटॉप की मांग ऑनलाइन मार्केट में बढ़ गई है।
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नि:शुल्क मिले लैपटॉप के खरीददार तलाशने के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों से छात्रों ने ऑनलाइन खरीद-फरोख्त करने वाली वेबसाइट पर इसके विज्ञापन अपलोड किए हैं। इन छात्रों ने सरकारी लैपटॉप को 'अखिलेश लैपटॉप' नाम दिया है। इंटरनेट की दुनिया में इसे आसानी से तलाश सकते हैं।

लैपटाप का यह विज्ञापन अपलोड किया गया है सामान की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त करने वाली वेबसाइट ‘ओएलएक्स डॉट इन’ पर। यहां किसी को भी अपना सामान बेचने या खरीदने के लिए मुफ्त में विज्ञापन पोस्ट करने की आजादी है।
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इसी वेबसाइट पर हजरतगंज लखनऊ और वाराणसी के छात्रों ने लैपटॉप बेचने की इच्छा जताई है। हजरतगंज के छात्र अहमद ने इसे 6000 रुपये बिक्री का मूल्य रखा है, तो वाराणसी के आरपी सोनू ने 15 हजार में अखिलेश लैपटॉप बेचने का रेट बताया है। हालांकि रिपोर्टर ने इनके नंबर पर लैपटॉप लेने के लिए संपर्क के नंबर पर फोन किया तो दिन में फोन पहुंचकर बाहर रहा।

सरकारी लैपटॉप की पहचान मुश्किल
सरकारी लैपटॉप की बिक्री कानूनी तौर पर अवैध है। हालांकि अखिलेश लैपटॉप की पहचान करना भी खासा कठिन है। अगर कोई इसे खरीदता है तो उसकी पहचान आसान नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो सरकारी लैपटॉप में मिली विंडो को अगर बदल दिया जाए तो आगे इसे पकड़ना संभव नहीं होगा।

लैपटॉप की अच्छी डिमांड
सिर्फ बेचने वाले नहीं, अखिलेश लैपटॉप की ऑनलाइन खरीद करने वाले बहुतेरे हैं। ‘ओएलएक्स’ की वेबसाइट पर दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने यही लैपटॉप खरीदने के लिए विज्ञापन पोस्ट किए हैं। किसी ने आठ हजार में तो किसी ने 10 हजार रुपये में खरीदने की इच्छा जताई है।
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लैपटॉप बेचा तो तुरंत पकड़ा जाएगा
सरकार ने इंटर पास छात्रों को जो लैपटॉप बांटे हैं उनमें एंटी थेफ्ट सिस्टम लगा हुआ है। इसके लिए एक खास किस्म की चिप लगाई गई है। इसके जरिए हमारे पास पूरा डाटा है कि कौन सा लैपटॉप किस स्कूल में और किस बच्चे को दिया गया। हम इसकी लगातार मॉनीटरिंग भी करते हैं। लैपटॉप वितरण के बाद एक महीने के अंदर ही पहली बॉर मॉनीटरिंग की जाती है। यदि कोई दूसरा व्यक्ति उस लैपटॉप का उपयोग करता है तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। कुछ दिन पहले बस्ती में सात ऐसे लैपटॉप पकड़े भी गए थे। सिर्फ 10 दिन में ही मामला पकड़ में आ गया था। ऐसे मामलों में खरीदने और बेचने वाले दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।
जितेंद्र कुमार, सचिव माध्यमिक शिक्षा
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