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युवा दिवस- काम के प्रति दिलचस्पी से दिखाई निष्ठा, ऊंचाईयों पर पहुंच हांसिल की प्रतिष्ठा

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कासगंज। स्वामी विवेकानंद के सूत्रों से वे सफलता के सौपानों तक तमाम युवा पहुंचे। अन्य युवाओं के लिए भी वे प्रेरणास्रोत बने हैं। युवाओं के लिए समर्पित स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर आज प्रस्तुत हैं कुछ युवाओं की सफलता की कहानियां।
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संकल्प- विद्यार्थियों में निखारेंगे हैंडबॉल की प्रतिभा
एनआर पब्लिक स्कूल के प्रबंधक विवेक राजपूत में बचपन से ही खेल के प्रति रुचि थी। वर्ष 2001 से उन्होंने हैंडबॉल प्रतियोगिताओं में सहभाग शुरू कर दिया। फिर तो वे ऊंचाइयों तक बढ़ते गए और राष्ट्रीय स्तर के हैंड बॉल खिलाड़ी बने। केरल, दिल्ली सहित कई स्थानों पर उन्होंने खेलों में प्रतिभाग किया। राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार भी मिले। अब वे अपने स्कूल के विद्यार्थियों में भी हैंडबॉल की प्रतिभा को निखारने में जुटे हैं।
संकल्प-युवा कवि, कवियत्रियों को आगे बढ़ाने का है संकल्प
शहर की युवा कवियत्री समीक्षा जादौन युवाओं के लिए काव्य के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बनी हैं। विद्यार्थी जीवन से ही उन्हें काव्य के क्षेत्र में विशेष रुचि थी। शब्दों के चयन की दीवानगी थी। समीक्षा कहती हैं कि स्वामी विवेकानंद जी के सूत्र अपने को जानो से प्रेरणा ली। फिर धीमे-धीमे काव्य के क्षेत्र में सफलताएं मिलीं। आज अखिल भारतीय कवियों की श्रेणी में समीक्षा शामिल हैं। काव्य क्षेत्र में रुचि दिखाने वालों को आगे बढ़ाने का संकल्प है।
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संकल्प-जरूरतमंदों को रक्त समय से मिले
जानकारी होते ही जरूरतमंदों को रक्त देने के लिए अपनी टीम के साथ पहुंच जाते हैं। किसी के बुलावे की जरूरत नहीं समझते। यह सब अपने साथियों के साथ मिलकर कर रहे हैं शहर के संभव जैन, जो युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा हैं। संभव कहते हैं कि 15 साल पहले उनके नाना की बाईपास सर्जरी हुई। उन्हें ब्लड की जरूरत थी। काफी तलाश के बाद भी रक्तदाता नहीं मिल रहा था। फिर उन्होंने स्वयं रक्तदान किया। उस समय लगा कि न जाने कितने लोग रक्त के लिए भटकते होंगे और फिर प्रेरणा लेकर अपने साथी ललित, वैभव, पंकज, वसंत, विजय एवं कुछ अन्य के साथ एक समूह बनाया। पिछले 6 सालों से वे अस्पतालों में पहुंच समूह के साथ रक्तदान करने में जुटे हैं।
संकल्प-पिछडे़ इलाकों के युवा आगे बढे़ं और मुकाम हासिल करें
एक छोटे से गांव में साधारण परिवार में रहकर प्राथमिक शिक्षा से लेकर माध्यमिक शिक्षा सरकारी स्कूल में हासिल की। गंजडुंडवारा के गांव सिद्धनगर निवासी अजय कुमार ने प्रारंभिक शिक्षा से ही लक्ष्य तय कर लिया था कि वे आईएएस बनेंगे। पिता ओमवीर सिंह प्रेरणास्रोत बने, पिता ही गुरु बने। बीती साल अगस्त माह में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल की है। वे अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। उनका संकल्प है कि पिछडे़ इलाकों के युवा आगे बढे़ं और मुकाम हासिल करें। वे उनकी मदद भी करेंगे।
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