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Agra: नशे की तरह तड़पा रही ऑनलाइन गेम की लत, खाने-पीने का भी ध्यान नहीं, कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा असर

Sat, 19 Nov 2022 03:38 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

युवाओं और बच्चों में ऑनलाइन गेम में लत नशे की तरह पड़ रही है। इससे मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पहले लत लगने का आशय शराब या तंबाकू जैसे नशे के पदार्थों के सेवन से लगाया जाता था। अब व्यवहार की लत (बिहेवियर एडिक्शन) के मामले बड़ी संख्या में चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। मोबाइल व लैपटॉप पर ऑनलाइन गेम की लत के शिकार नशे के बीमार की तरह तड़पते हैं। 

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यह कहना है पीजीआई चंडीगढ़ के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष बासु का। वह इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइकियाट्री (आईएएसपी) की ओर से आगरा के होटल ताज व कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अधिवेशन में आए हैं। तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का शुक्रवार को आगाज हुआ। इसका विषय ‘मानसिक रोगों के पैदा होने व उसके ठीक होने में सामाजिक कारकों की भूमिका’ है। 

डॉ. देवाशीष बासु ने बताया कि विभिन्न जांचों में व्यवहार की लत वाले मरीजों में वही बदलाव देखे गए हैं जो कि नशे के आदी लोगों में मिलते हैं। कई लोगों में लत इस कदर हावी होती है कि वह समय से खाते-पीते भी नहीं, जिससे मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। किशोर व युवाओं में व्यवहार के लत की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इनके कार्य क्षमता पर भी असर पड़ता है।

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अच्छी शिक्षा से मनोरोगी होने से बचा जा सकता है

मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि अच्छी शिक्षा से मनोरोगी होने से बचा जा सकता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि अभी भी समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कम है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी मानसिक तनाव से ग्रस्त होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। 

कोरोना के बाद महिलाएं दोगुनी तनावग्रस्त 

एम्स, दिल्ली के डॉ. सिद्धार्थ सरकार ने बताया कि कई अध्ययन में परिणाम आया कि कोरोना के दौरान अधिक उम्र के लोगों के जगह कम उम्र के लोग अधिक तनावग्रस्त थे। वहीं, पुरुषों की अपेक्षा दोगुना महिलाएं तनाव में थीं। उन्होंने कहा कि इसका सही कारण पता नहीं चल पाया है। 
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