पहले लत लगने का आशय शराब या तंबाकू जैसे नशे के पदार्थों के सेवन से लगाया जाता था। अब व्यवहार की लत (बिहेवियर एडिक्शन) के मामले बड़ी संख्या में चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। मोबाइल व लैपटॉप पर ऑनलाइन गेम की लत के शिकार नशे के बीमार की तरह तड़पते हैं।
यह कहना है पीजीआई चंडीगढ़ के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष बासु का। वह इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइकियाट्री (आईएएसपी) की ओर से आगरा के होटल ताज व कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अधिवेशन में आए हैं। तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का शुक्रवार को आगाज हुआ। इसका विषय ‘मानसिक रोगों के पैदा होने व उसके ठीक होने में सामाजिक कारकों की भूमिका’ है।
डॉ. देवाशीष बासु ने बताया कि विभिन्न जांचों में व्यवहार की लत वाले मरीजों में वही बदलाव देखे गए हैं जो कि नशे के आदी लोगों में मिलते हैं। कई लोगों में लत इस कदर हावी होती है कि वह समय से खाते-पीते भी नहीं, जिससे मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। किशोर व युवाओं में व्यवहार के लत की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इनके कार्य क्षमता पर भी असर पड़ता है।