आगरा में शाहगंज के आजमपाड़ा में बंदरों के हमले से बचकर भागे व्यक्ति की छत से गिरकर मौत हो गई। आजमपाड़ा निवासी जूता कारीगर उस्मान की बेटी को बंदरों ने छत पर घेर लिया था। उस्मान बेटी को बचाने के लिए पहुंचे तो बंदरों ने उन पर भी हमला बोल दिया।
परिजनों ने बताया कि शुक्रवार सुबह तकरीबन साढ़े आठ बजे उस्मान की दस वर्षीय बेटी सानिया घर की छत पर गई थी। छत पर 8-10 बंदर बैठे थे। बंदर सानिया को काटने के लिए दौड़े। उसकी चीखपुकार सुनकर उस्मान छत पर डंडा लेकर गए।
तभी बंदरों ने उन पर हमला बोल दिया। दो बंदर उनकी छाती पर कूद गए। बचने को भागे उस्मान छत से नीचे गली में गिर गए। उनके सिर में चोट लगी। परिजन उनको एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए। जहां उनको मृत घोषित कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उस्मान के साथ दो बंदर भी नीचे गिर गए थे, लेकिन वह बच गए।
ताजमहल पर भी बंदरों का आतंक
घर के अकेले कमाने वाले थे
उस्मान के चार बच्चे हैं। इनमें सानिया, सोबिया, कशिश और गोलू हैं। घर में उस्मान ही अकेले कमाने वाले थे। अब कोई सहारा नहीं है। उनकी पत्नी रूबी को परिजन किसी तरह संभाल रहे थे।
पहले भी बंदर ले चुके हैं जान
शहर में बंदरों के हमले में मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। 31 जुलाई, 2019 को कोतवाली स्थित मोहल्ला कूंचा साधूराम में हरीशंकर (55) की जान चली गई थी। हरीशंकर घर के बाहर खड़े हुए थे। तभी बंदर ने हमला बोला था।
आठ अक्तूबर, 2018 में एमजी रोड पर बाइक के आगे बंदर के आने की वजह से एक युवक की मौत हो गई थी। दो साल पहले नाला काजीपाड़ा स्थित एक घर की छत से गिरकर चाऊमीन विक्रेता की मौत हो गई। इनके अलावा भी कई घटनाएं हुई हैं।
आजमपाड़ा के लोग परेशान
आजमपाड़ा में बंदरों का आतंक है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि बंदरों की वजह से वह अपने घर का गेट खोलकर नहीं रखते हैं। बंदर अंदर प्रवेश करते हैं और सामान लेकर चले जाते हैं। अगर कोई बंदरों को डंडे से भगाने की कोशिश करता है तो उस पर हमला कर देते हैं।