बुधवार को मृतक के बेटे योगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। उसने पिता की हत्या करना कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर गांव शंकरपुर में प्राथमिक विद्यालय के पास तालाब से हत्या में प्रयुक्त देसी तमंचा, वोटर आईडी, एक आधार कार्ड, एक राशन कार्ड, बैंक पासबुक बरामद किए।
महिला को 15 लाख देने की बात सुनी तो बनाई हत्या की योजना
योगेंद्र से पुलिस पूछताछ में पता चला कि नारायण के 22 साल से ताजगंज की एक महिला से संबंध थे। कॉल डिटेल से भी महिला के साथ नारायण के संपर्क का पता चला। महिला के बैंक खातों में पति की जगह नारायण का नाम था।
योगेंद्र के अनुसार वर्ष 2013 में नारायण ने उसे टीडीआई मॉल के पास प्लॉट दिलवाया और मकान बनवाया। वो इससे गुस्से में था। घटना वाले दिन पिता और महिला के बीच बातचीत में 15 लाख रुपये आलू बेचकर देने के बारे में सुना तो हत्या का प्लान बनाया। पुलिस ने महिला के नाम हुए बेनामे के कागजात भी बरामद किए हैं।
एसएसपी ने बताया कि नारायण पहलवान के योगेंद्र के अलावा एक बेटा गजराज और है। पूछताछ में परिवार के लोग आरोपियों की पहचान कराने में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं दे रहे थे। इस पर शक हो गया। क्षेत्र के लोगों ने पुलिस को बताया कि नारायण ही घर का खर्च उठाते थे। वो बेटों को कुछ भी नहीं देते थे। हिसाब-किताब भी नहीं बताते थे।
14 वें दिन की आरोपी की गिरफ्तारी
घटना वाले दिन नारायण खाना खाने के बाद घर के बाहर ही सो रहे थे। तभी योगेंद्र घर के पिछले गेट से आया और पिता के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद घर में ही चला गया। नारायण के भाई पास में ही रहते हैं।
उन्होंने गोली की आवाज सुनी, लेकिन वो समझ नहीं पाए। वो वापस सो गए। पुलिस को योगेंद्र पर शक एक दिन बाद से ही हो गया था। पुख्ता सुबूत मिलने पर उसे पकड़ा। वह पिता की तेरहवीं कर चुका था। 14 दिन बाद पुलिस ने पकड़ लिया।