माई सिटी रिपोर्टर
आगरा। सदर की दो सगी बहनों के धर्मांतरण के खुलासे की जांच में पुलिस को कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से कम उम्र की लड़कियों से संपर्क करता था। पहले चैटिंग से बात शुरू होती थी। एक बार बात आगे बढ़ने पर फोन कॉल करते थे। धर्मांतरण कराने वाले अपने धर्म की अच्छाई और दूसरे धर्म की कमियों को इंगित कर जाल में फंसा लेते थे। एक ही धर्म की छात्राओं का धर्म परिवर्तन कराने बाद अन्य को भी प्रोत्साहित करते थे।
आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने जुलाई में धर्मांतरण गिरोह का खुलासा किया था। सदर की दो सगी बहनों को कोलकाता ले जाकर उनका धर्म परिवर्तन करा दिया गया था। निकाह कराने की तैयारी थी। इनमें एक बहन पीएचडी कर चुकी थी। उसे कॉलेज में मिलीं कश्मीरी युवतियों ने जाल में फंसाया था। एक बहन से दूसरी बहन गिरोह के संपर्क में आई थी। इस प्रकरण में पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कोलकाता के तपसिया इलाके से दोनों बहनों को पुलिस लेकर आई थी।
पुलिस ने आरोपियों को 10 दिन तक रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। आरोपियों में दिल्ली निवासी अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल, गोवा की आयशा और आगरा के रहमान कुरैशी सहित अन्य शामिल थे। अब्दुल रहमान के संबंध बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने वाले कलीम सिद्दीकी से सामने आए थे। पुलिस की जांच में सामने आया था कि गिरोह के संपर्क में 350 से 400 लोग थे।
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इंस्टाग्राम पर नाम के आगे लिखते थे रिवर्ट
पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह लोग एक बार धर्म परिवर्तन करने के बाद एक ग्रुप से जुड़ जाते थे। पुलिस के मुताबिक, अमूमन धर्म परिवर्तन कराने पर कन्वर्ट करना कहा जाता है मगर इस मामले में ऐसा नहीं था। धर्म बदलने वालों ने इंस्टाग्राम पर रिवर्ट नाम से आईडी बना रखी थी। हर व्यक्ति अपनी आईडी के नाम के आगे रिवर्ट लगाता था। रिवर्ट का मतलब घर वापसी था। ये लोग सोशल मीडिया अकाउंट पर धर्म परिवर्तन कराने से संबंधित वीडियो डालते थे। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि गिरोह के निशाने पर 17 से 22 साल की लड़कियां रहती थीं। गिरोह में शामिल लोग सोशल मीडिया के माध्यम से इनके संपर्क में आते थे। अगर कोई बात करना पसंद करता था तो उससे काॅल करते थे। मदद और धर्म के नाम पर बरगलाते थे। फिर किसी न किसी बहाने से लड़कियों को दिल्ली बुलाया जाता था। उनका ब्रेनवाश किया जाता था। पुलिस ने रिवर्ट नाम से आईडी चलाने वाले 400 से अधिक युवक और युवतियों को चिह्नित किया है। इनमें कई लोग बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने में शामिल थे। पुलिस ने कई से बातचीत शुरू की। इसकी भनक लगने पर अपनी आईडी को बंद कर लिया। पुलिस ने साै से अधिक लोगों से संपर्क कर जानकारी हासिल की।
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पुलिस कर रही जांच
सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से गिरोह के सदस्य कम उम्र की लड़कियों को फंसाकर उनका धर्मांतरण कराते थे। सोशल मीडिया पर रिवर्ट नाम से जिन लोगों के अकाउंट मिले थे, उनकी जानकारी विभिन्न जांच एजेंसियों को दी गई है। स्थानीय स्तर पर भी पुलिस जांच कर रही है।
सैयद अली अब्बास, डीसीपी सिटी
डाॅ. रमीज की जानकारी जुटा रहीं टीमें
हाल ही में किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में याैन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी डाॅ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज के तार दिल्ली धमाके से जुड़े रहे डाॅ. परवेज से भी सामने आए हैं। वर्ष 2012 में दोनों ने एसएन मेडिकल काॅलेज से पढ़ाई की थी। उन्होंने एक ग्रुप बनाया था। इसके जरिये धर्मांतरण का जाल फैलाया था। डाॅ. रमीज ने काॅलेज की टाॅपर छात्रा को जाल में फंसाकर शोषण किया था। डॉ. परवेज दिल्ली धमाके की सूत्रधार डाॅ. शाहीन का भाई है। जांच एजेंसियां एसएन मेडिकल काॅलेज में दोनों के संपर्क में आए लोगों के बारे में जानकारी ले रही हैं। दोनों वर्ष 2017 तक रहे। इस दाैरान अपने ग्रुप से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को जोड़ लेते थे। प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि जांच एजेंसियों ने अभी संपर्क नहीं किया है। डाॅ. परवेज अंसारी का शैक्षिक रिकाॅर्ड दिया जा चुका है। डाॅ. रमीज के बारे में भी जानकारी मांगने पर उपलब्ध कराई जाएगी।