आगरा। दुनिया भर में 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाएगा। भारत में इसे लेकर घमासान मचा है। मुसलमान सूर्य नमस्कार और ऊं के उच्चारण को गैरइस्लामिक बताते हुए, तो विपक्षी दल जबरन थोपे जाने का आरोप लगाते हुए दिवस का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा के ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ ने ‘योग और इस्लाम’ नाम से पुस्तक प्रकाशित की है। इसमें न केवल नमाज और योग में करीबी संबंध बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम को योगी तक बताया गया है। ऐसा बताने की दलीलें भी हैं। मुसलमान भ्रमित न हों, योग से जुड़ें इसलिए पुस्तक उनके बीच वितरित की जाएगी। इसमें कहा गया है कि कुछ लोग योग को हिंदू धर्म के प्रचार के रूप में देख रहे हैं। मगर, ऐसा नहीं है। एकमात्र उद्देश्य यह बताना है कि योग स्वस्थ और प्रसन्न रहने की विधि है।
पुस्तक में खास-खास
योग गैरइस्लामी नहीं
योग को हिंदू धर्म से जोड़ा जा रहा है जबकि इसके जनक महर्षि पतंजलि ने इसे कभी धर्म अथवा उपासना पद्धति से नहीं जोड़ा। प्राणायाम के समय ऊं के पारंपरिक उच्चारण पर योगगुरु बाबा रामदेव कहते हैं कि यह पारंपरिक है। जिसे ऊं से आपत्ति है, वह अपने धर्मानुसार कुछ भी बोल सकता है। यह भी बताया गया है कि दुनिया के 46 मुस्लिम देशों ने योग को स्वीकारा है।
नमाज भी एक तरह का योगासन
योग शब्द की उत्पत्ति ‘युज’ धातु से हुई, जिसका अर्थ है जोड़ना। योग जीवात्मा के परमात्मा से जुड़ने की विधि है। इस्लाम के पांच बुनियादी अरकानों में एक नमाज भी है। यह ऐसी ध्यान विधि है, जिसके द्वारा मुसलमान खुद को अपने माबूद के करीब करने की कोशिश करता है। योग की क्रियाएं आसन कहलाती हैं। इसी आधार पर मिस्र के कई धर्मगुरुओं ने योग को इस्लामी व्यायाम कहा था। उन्होंने नमाज को योग और योग को नमाज बताया था। नमाज फारसी शब्द है। इसकी व्युत्पत्ति संस्कृत के शब्द नम (झुकना) और युज (जोड़ना) से हुई है। यह योग के का समानार्थी है।
महान योगी भी थे नबी-ए-करीम
किताब में ओशो के हवाले से कहा गया है कि योग का संबंध इस्लाम, सिख, जैन और हिंदू आदि धर्म से नहीं। मुहम्मद साहब, जीसस, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर जिसने भी सत्य का साक्षात्कार किया, बिना योग के नहीं किया। किताब में लिखा है, ‘नबी-ए-करीम अल्लाह की तरफ से भेजे गए नबी थे। आपके किरदार से लगता है कि आप बहुत बड़े योगी भी थे।’
इस्लाम में ऊं
1905 में स्वामी रामतीर्थ ने कुरआन के आलिफ, लाम मीम का अर्थ ऊं बताया था।
इस पुस्तक के माध्यम से हम मुसलमानों को बताना चाहते हैं कि योग से आदमी निरोगी बनता है। इसे किसी मजहब से जोड़कर न देखा जाए।
इस्लाम अब्बास, सह प्रभारी, उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड