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जहरीला हुआ यमुना का पानी: कपड़े धोने लायक भी नहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में चाैंकाने वाला खुलासा

Sun, 01 Nov 2026 02:59 PM IST
Arun Parashar अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

ताजमहल के आगे करवन नदी के मिलने वाले इस स्थान पर फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 21,000 एमपीएन तक पाई गई, जो प्रवेश बिंदु के मुकाबले करीब पांच गुना अधिक है।
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यमुना नदी में गिर रहा मंटोला नाला। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के रुनकता से शहर में प्रवेश करने वाली कालिंदी (यमुना) नदी में जितना सीवर और घातक रसायन समाते हैं, उससे पांच गुना अधिक जहर आगरा की सीमा से निकलते समय इसमें घुल रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसे नगर निगम के साथ साझा किया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 91 नालों के जरिये भारी मात्रा में सीवर सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे यमुना का पानी खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुका है। नगर निगम सीमा में गिरने वाले 91 नालों में से कागजों पर करीब 45 नालों को टैप करने का दावा किया जाता है लेकिन इन दावों की पोल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने खोल दी है। बोर्ड की ओर से नदी के अलग-अलग 11 स्थानों से लिए गए पानी के सभी सैंपल जांच में फेल हो गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सभी जांच बिंदुओं पर यमुना का पानी डी श्रेणी का पाया गया है, जो न तो आचमन (पीने) योग्य है और न ही कपड़े धोने या सिंचाई के लायक बचा है। कैलाश घाट पर नदी में प्रवेश के समय फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 930 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज की गई। कैलाश मंदिर पर कोलीफॉर्म की मात्रा बढ़कर 4,100 तक पहुंच गई। मोहरे वाली दरगाह (करवन नदी संगम) पर डाउनस्ट्रीम में हालात सबसे बदतर हैं। ताजमहल के आगे करवन नदी के मिलने वाले इस स्थान पर फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 21,000 एमपीएन तक पाई गई, जो प्रवेश बिंदु के मुकाबले करीब पांच गुना अधिक है।
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मार्च 2028 तक सीवर-मुक्त यमुना का दावा
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए शहर के शेष 45 नालों को टैप किया जाना है लेकिन यह योजना मार्च 2028 तक ही पूरी हो सकेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत इस पर 127 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पांच नए पंपिंग स्टेशन बनाने, तीन पुराने पंपिंग स्टेशनों को अपग्रेड करने और लगभग 36 किलोमीटर लंबी नई सीवर लाइनें बिछाने का प्रस्ताव है, ताकि नालों के पानी को रोककर एसटीपी तक पहुंचाया जा सके। वर्तमान में पोइया घाट, बल्केश्वर, पीलाखार, जगनपुर, भैरों नाला, वाटरवर्क्स, मनोहरपुर, नरायच, गोकुल नगर, गणेश नगर, रामबाग, कटरा वजीर खां, चीनी का रोजा, एत्माद्दौला, प्रकाश नगर और ताज पूर्वी गेट के नाले नदी में सबसे अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं।

नालों को टैप करने का काम मार्च 2028 तक पूरा होगा। करीब 18 माह का समय सीवर लाइनें डालने में लगेगा। आबादी बढ़ने के साथ ही नालों का डिस्चार्ज बढ़ा है। 100 एमएलडी का नया एसटीपी बनने के बाद सुधार होगा। - मोहित कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, जल निगम शहरी इकाई

यमुना नदी में नालों के गिरने के मामले में नगर निगम पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लग चुकी है। 10 करोड़ रुपये एनजीटी में जमा कराए गए हैं। टैपिंग की योजना जल निगम ने बनाई है। हमने बायोरेमेडिएशन किया है। जल्द सुधार नजर आएगा। -पंकज भूषण, पर्यावरण अभियंता
 

इन नालों के मिलने पर बिगड़ रही यमुना

स्थान

कोलीफॉर्म

फीकल कोलीफॉर्म

मोहरे वाली दरगाह

21,000

4,500

जीवनी मंडी वाटरवर्क्स

14,000

3,800

ताज दशहरा घाट

9,400

2,600

बटेश्वर मंदिर घाट

7,900

1,200

कैलाश घाट

4,100

930

नोट: सभी आंकड़े एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर में हैं।

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