यमुना के रौद्र रूप ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। खेतों में पानी भरने से किसान अपनी कच्ची फसलें समय से पहले काटने को मजबूर हो गए हैं। क्योंकि फसल न बचाई, तो पशुओं के लिए चारा भी नहीं मिलेगा।
हथिनी कुंड व गोकुल बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद उफान पर आई यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे तटीय किसानों के होश उड़े हुए हैं। फिरोजाबाद के टूंडला में खादारों की फसलों में पानी घुसने पर वे कच्ची ही फसल काट रहे हैं।
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पिछले कुछ दिनों मूसलाधार बारिश के बीच हथिनी कुंड व गोकुल बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण यमुना में बाढ़ की स्थिति बन गयी है। यमुना खादरों में बाजरा, मक्का, ज्वार, सब्जियों जैसी खड़ी तमाम फसलें जलमग्न हो गई है।यमुना तट पर लगे पंपसेटों के डूबने का डर सता रहा है। साथ ही यमुना किनारे बने घरों तक पानी आने की भी आशंका से तटीय ग्रामीण बढ़ते जल स्तर पर नजर बनाये हुए हैं।
फसल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंगलवार सुबह भी जल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। लगातार बढ़ते जलस्तर ने किसानों की नींद उड़ी हुई है। यमुना जलस्तर के लगातार बढ़ाने पर किसान और प्रशासन दोनों ही लगातार नजर बनाए हुए हैं। किसान रोमन सिंह, देवकरन, मुरारीलाल और साहब सिंह, मुरारीलाल, रुपसिंह, हरी सिंह ने बताया कि यदि जलस्तर इसी बढ़ाता रहा तो उनकी फसलों को भारी नुकसान होगा। रामगढ़ निवासी किसानों ने बताया की की फसलों में पानी भरने से ख़राब हो जाएगी ऐसे में वे उन फसालों को काटकर पशुओं के लिए हरा चारे के रूप में काटकर ट्यूब के माध्यम से ला रहे हैं।
लगातार जलवृद्धि हुई तो ये गांव होंगे प्रभावित
पिछले चार दिनों से यमुना का जलस्तर जिस तरह से बढ़ रहा है अगर यही हाल रहा तो टूंडला क्षेत्र के नगला केशों, रुधऊ मुस्तकिल, अनवारा, जटपुरा, बालमपुर, रसूलाबाद, ग़दलपुरा, रामगढ़, बजहेरा, नगला काले, कुतुकपुर साहब, ठार डेका, ठार वर, ठार हरवंस, नगला राजपति, गुवारई, घुरुकूआं, नगला नंदा, नगला मूसटा , नियामतपुर आदि गांव प्रभावित होंगे।
एसडीएम दिव्या सिंह ने बताया कि यमुना के बढ़ते जल स्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लेखपाल व प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं कि वह बढ़ते चले स्तर पर नजर रखें। इसके साथ ही बाढ़ आने की स्थिति से निपटने के लिए सारे इंतजाम कर लिए गए हैं।