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UP: तमाशा देखता रहा सिंचाई विभाग, बिक गया यमुना का डूब क्षेत्र; कॉलोनियों से लेकर अपार्टमेंट तक खड़े कर दिए

Sun, 08 Dec 2024 10:26 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

सिंचाई विभाग तमाशा देखता रहा और यमुना का डूब क्षेत्र बिक गया। यहां पर कॉलोनियां, अपार्टमेंट से लेकर फार्म हाउस व अन्य पक्के अवैध निर्माण भी बंद नहीं हुए।

 
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यमुना
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विस्तार
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आगरा में यमुना का डूब क्षेत्र बिक गया। सिंचाई विभाग तमाशा देखता रहा। अवैध निर्माण ध्वस्त करने व डूब क्षेत्र निर्धारण आदेश भी अफसरों ने हवा में उड़ा दिए। जिस वजह से अवैध कॉलोनियां, अपार्टमेंट, फार्म हाउस व अन्य पक्के निर्माण रोक के बावजूद बंद नहीं हुए।
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पर्यावरणविद डीके जोशी (अब दिवंगत) की याचिका पर एनजीटी ने यमुना डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। डूब क्षेत्र में हुए इन अवैध निर्माणों का नक्शा एडीए ने पास किया था। 2016 में एनजीटी के आदेश पर 70 निर्माण ध्वस्त हुए। बाकी निर्माणों के संबंध में एडीए से अनुपालन आख्या मांगी गई, जो आठ साल बाद भी नहीं भेजी।

कैलाश मंदिर से रहनकला तक आगरा की सीमा में करीब 30 किमी डूब क्षेत्र में हजार से अधिक अवैध निर्माण खड़े हैं। सिंचाई विभाग, आगरा विकास प्राधिकरण, पुलिस व प्रशासन की मिलीभगत से इन निर्माणों ने हजारों जिंदगियों को बाढ़ आने पर खतरे में डाल दिया है।
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पेड़ कटने पर सोता रहा वन विभाग
डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण ध्वस्त करने के नाम पर जहां एक तरफ सिंचाई और आगरा विकास प्राधिकरण एक-दूसरे पर टालते रहते हैं। वहीं, डूब क्षेत्रों में पेड़ों के कटान पर वन विभाग सोता रहा। माथुर फार्म हाउस में हरियाली के कत्ल पर भी अफसर नहीं जागे। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की मिलीभगत से पेड़ों पर आरी चली। फार्म हाउस मालिक से बदले में सुविधा शुल्क भी वसूला गया।

सुप्रीम कोर्ट में जमा होगी रिपोर्ट
माथुर फार्म हाउस में काटे गए पेड़ों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो कोर्ट ने मौका-मुआयना के लिए सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) को भेजा। शुक्रवार को सीईसी ने फार्म हाउस में काटे गए पेड़ों के ठूठ देखे। फिर सर्किट हाउस में बैठक की। सीईसी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट कोई निर्णय देगा।

200 मीटर तक निर्माण पर रोक
 यमुना डूब क्षेत्र में लगाई गई मुड्डियों से 200 मीटर परिधि में निर्माण पर रोक है। इस संबंध में एनजीटी का आदेश है। दूसरी तरफ मास्टर प्लान 2031 में एडीए ने डूब क्षेत्र में 200 मीटर क्षेत्र निर्माणों के लिए प्रतिबंधित किया है। यहां कोई नक्शा पास नहीं हो सकता। मनोहरपुर, बूढ़ी का नगला, जगनपुर से बल्केश्वर तक नदी किनारे अवैध निर्माण खड़े हैं। वहीं, इस संबंध में सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता कर्णपाल सिंह का कहना है कि अवैध निर्माण ध्वस्त करना एडीए की जिम्मेदारी है। एडीए उपाध्यक्ष का कहना है अवैध निर्माणों की जांच कराई जाएगी।
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