सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) के अध्ययन से यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों के दो प्रमुख कारण सामने आए हैं। इसमें पहला वाहनों की अनियंत्रित स्पीड और दूसरा घिसे हुए टायर, इन दोनों वजह से एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। ऐसे में यदि इन दोनों पर अमल कर लिया जाए तो एक्सप्रेसवे पर हादसों में कमी लाई जा सकती है।
इसको लेकर आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति को हाल ही में हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के कुछ बिंदुओं को सुझाव बतौर भेजा है। एडीएफ का कहना है कि टोल प्लाजा पर ‘डिजीटल डिस्प्ले बोर्ड’ पर वाहनों का ‘गति उल्लघंन’ लिखा आ जाता है। इसके बावजूद इन वाहनों का चालान नहीं किया जाता। एडीएफ ने सुझाव दिया है कि यमुना एक्सप्रेसवे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, महामायानगर व गौतमबुद्ध नगर जनपदों से गुजरता है, इसलिए एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग थाने होने चाहिए, जिससे कि गति सीमा का उल्लघंन करने वालों पर चालान काटा जा सके। एडीएफ का यह भी सुझाव है कि घिसे हुए टायरों वाले वाहनों को एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति न दी जाए। अपने सुझाव पत्र में समिति का ध्यान इस ओर भी दिलाया है कि 80 से 90 प्रतिशत हल्के मोटर वाहन 100 किमी प्रति घंटा की निर्धारित गति से अधिक गति पर वाहन चलते हैं। जो दंडनीय है। एडीएफ के सचिव केसी जैन व संयुक्त सचिव राकेश गर्ग का कहना है कि समिति द्वारा सुझावों को स्वीकार नहीं किया जाता है तो एडीएफ उच्च न्यायालय की शरण में दोबारा जाएगा।