टीबी (क्षय रोग) की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाए और मरीज विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार कराए तो यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। लक्षण पहचाने में देरी और दवा बीच में छोड़ना मरीज को भारी पड़ता है। टीबी प्रिवलेंट सर्वे वर्ष 2019-2021 के मुताबिक टीबी के महज 60 फीसदी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। 40 फीसदी को टीबी के लक्षण पता नहीं होते हैं। इन्हें खोजना पड़ रहा है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के क्षय व वक्ष रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि समाज टीबी के प्रति जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग टीबी मरीज खोज अभियान चला रहा है। टीबी का इलाज संभव है। इसके बाद भी प्रतिवर्ष देश में 5 लाख मौतें हो रही हैं, जो कि विश्व का 32 फीसदी हैं। इलाज बीच में छोड़ना और चिकित्सक के परामर्श के अनुरूप दवाएं न लेना इसकी वजह है।
इलाज की अवधि चार माह करने पर काम
डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि अभी टीबी का इलाज छह माह तक चलता है। कई मरीज इस वजह से भी दवा बीच में छोड़ देते हैं। अब नई दवाएं आ गई हैं, इससे इलाज की अवधि चार माह हो जाएगी। दवाएं महंगी हैं, सरकार की योजना में शामिल होने पर सस्ती हो जाएंगी।
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टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह अधिक की खांसी।
- खांसी के साथ बलगम का आना।
- शाम के समय बुखार आना ।
- भूख न लगना। लगातार वजन कम होना।
- रात को सोते समय पसीना आना।
- कभी-कभी बलगम के साथ खून आना।
इन बातों का रखें ध्यान
- खांसते और छींकते समय मुंह पर कपड़ा या रुमाल जरूर रखें।
- मरीज इधर-उधर न थूकें।
- टीबी के मरीजों से संपर्क कभी भी खाली पेट न करें।
- बलगम को मिट्टी अथवा राख से ढक दें।
- जिस परिवार में मरीज है उस परिवार के सभी सदस्य टीपीटी जरूर लें।
- बच्चों को मरीज की पहुंच से दूर ही रखें।
- 0 से 5 साल तक के बच्चों को टीपीटी प्रदान करें।
गत 6 वर्षों में जिले में टीबी मरीजों की संख्या
वर्ष
|
सरकारी अस्पताल
|
निजी अस्पताल
|
कुल मरीज
|
| 2017 |
4617 |
1090 |
5707 |
| 2018 |
7845 |
3919 |
11614 |
| 2019 |
9683 |
13389 |
23072 |
| 2020 |
7582 |
9282 |
16864 |
| 2021 |
9762 |
11513 |
21275 |
| 2022 |
11369 |
9690 |
21059 |
| 2023 |
2483 |
2380 |
4863 |
90 फीसदी से ज्यादा मरीज ठीक हुए
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीएल यादव ने बताया कि जिले में प्रति वर्ष ठीक हुए मरीजों की संख्या 90 फीसदी से ऊपर रही है। 6 माह तक लगातार इलाज कराने से टीबी पूरी तरह खत्म हो जाती है। बस मरीज दवा छोड़नी नहीं चाहिए।