विश्व नदी दिवस पर आगरा में यमुना भक्तों ने नदी की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए सीवेज, औद्योगिक कचरे और पीओपी मूर्तियों के विसर्जन पर रोक की मांग की। गोष्ठी में डिसिल्टिंग, मूर्ति विसर्जन के लिए अलग कुंड बनाने और धोबी घाट व भैंसों के स्नान पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।
विश्व नदी दिवस पर रविवार को एत्माउद्दौला व्यू पॉइंट स्थित यमुना आरती स्थल पर यमुना भक्तों ने गोष्ठी आयोजित की। यमुना की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। भक्तों ने नदी में सीधे गिर रहे सीवेज, औद्योगिक कचरे और पीओपी मूर्तियों के विसर्जन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
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इससे पहले यमुना की भव्य आरती उतारी गई। गोष्ठी में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया कि 1,378 किमी लंबी यमुना उत्तराखंड से हरियाणा के हथिनीकुंड तक ही स्वच्छ है। दिल्ली आते ही यह एक नाले में तब्दील हो जाती है। इटावा और हमीरपुर के आगे चंबल, पहुज, क्वारी, सिंध व केन नदियों के मिलने से ही इसका पानी थोड़ा साफ हो पाता है।
यमुना भक्तों ने डिसिल्टिंग की पुरानी मांग को प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही मांगपत्र के जरिए नदी किनारे मूर्ति विसर्जन के लिए अलग कुंड बनाने, धोबी घाट व भैंसों के स्नान पर पूरी तरह रोक लगाने और जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने की अपील की गई। इस मौके पर चतुर्भुज तिवारी, दीपक राजपूत, मुकेश चौधरी, महंत नंदन श्रोत्रिय, रंजन शर्मा और भगवान सिंह आदि मौजूद रहे।