छोटा परिवार, सुखी परिवार और हम दो हमारे दो... की मुहिम अब रंग ला रही है। इसका लोग भी महत्व समझने लगे हैं। पुरुष नसबंदी की संख्या बीते साल के मुकाबले तीन गुना से अधिक बढ़ी है। परिवार नियोजन के नोडल प्रभारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि पुरुष भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए परिवार नियोजन के साधनों के प्रति जागरूक हुए हैं।
जहां बीते पांच-आठ साल पहले 15 से 20 ही पुरुष नसबंदी को आगे आते थे। अब बीते दो-तीन साल से संख्या बढ़ने लगी है। 2018-19 में जहां 52 पुरुषों ने ऑपरेशन कराया तो 2019-20 में 188 ने। इस साल जून तक 32 पुरुषों का ऑपरेशन हो चुका है, कोरोना महामारी के कारण ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं।
इंजेक्शन-छाया गोली का ज्यादा हो रहा इस्तेमाल
एनएचएम जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि इंजेक्शन और छाया गोली के इस्तेमाल की दर करीब तीन से चार गुना बढ़ी है। वर्ष 2018 में अंतरा इंजेक्शन महज 1,893 ने अपनाया तो बीते साल 9300 ने यह इंजेक्शन लगवाया। छाया गोली वर्ष 2018 में 6,517 ने अपनाई तो 2020 में 25,852 महिलाएं गोली खाई।
महिलाएं जागरूक भी, सास का दबाव भी
स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन के प्रति महिलाएं ज्यादा जागरूक तो है हीं, साथ ही उन पर नसबंदी के लिए परिवार का ज्यादा दबाव रहता है। अक्सर महिला की सास या फिर अन्य महिला परिजन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ही नसबंदी के लिए आगे कर देती हैं। दंपति में से कोई भी नसबंदी कराए, परिवार का ही भला है।
परिवार नियोजन साधन 2018-19 2019-20 2020-21
पुरुष नसबंदी 52 188 32
महिला नसबंदी 9410 9920 9045
कॉपर-टी 33647 39017 28735
अंतरा इंजेक्शन 1893 9300 4327
छाया गोली 6517 25852 26702