कोरोना संक्रमण के समय भी मानविकार उल्लंघन के मामले कम नहीं हुए। इस साल नवंबर तक 100 से ज्यादा शिकायतें पुलिस के पास आई हैं। इतना ही नहीं, पुलिस पर भी लोगों के मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगा है।
कभी व्यापारी को घर के बाहर पीटा गया तो कभी व्यापारी के मुंशी की चौकी में लाकर पिटाई की गई। इतना ही नहीं दबिश के नाम पर महिलाओं की पिटाई लगाई। ठेल वाले पर भी दरोगा ने डंडे बरसाए। मानवाधिकार उल्लंघन पर पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई। मगर, दरोगा और सिपाहियों को निलंबित करके शिकायत ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
केस : 1 चौकी में लाकर पीटा था तेल व्यवसायी के मुंशी को
इस साल सितंबर में डीजल के ड्रम लेकर जा रही मेटाडोर को रुनकता चौकी पुलिस ने रोका था। आरोप लगा था कि पुलिस ने रुपयों की मांग की। कागजात होने के बावजूद गाड़ी को सीज कर दिया। इसके बाद तेल व्यवसायी के मुंशी को चौकी में लाकर पीटा था। उससे 23 हजार रुपये छीन लिए थे। मामले की शिकायत एडीजी अजय आनंद से की गई। मामला केंद्रीय मंत्री तक पहुंच गया था। इस मामले में जांच के बाद चौकी प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।
केस : 2 ट्रांसपोर्टर की घर के बाहर लगाई थी पिटाई
मई में कमला नगर में रहने वाले ट्रांसपोर्टर राकेश गुप्ता की पुलिस ने घर के बाहर पिटाई लगाई थी। उनको डंडों से पीटा था। इस घटना के बाद व्यापारियों में आक्रोश फैल गया था। मामले में दो सिपाहियों को निलंबित किया गया था। ट्रांसपोर्टर का कसूर इतना था कि वह बिना हेलमेट जा रहे थे। रास्ते में चेकिंग देखकर वापस आ गए थे। इस पर पुलिस पीछा करते हुए आ गई थी। घटना का सीसीटीवी फुुटेज भी सामने आया था।
केस : 3 दबिश के दौरान महिलाओं को पीटा था
सितंबर की घटना है। मामला जीवनी मंडी के नया घेर का था। दो पक्षों में मारपीट हुई थी। जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। आरोपी पक्ष फरार था। पुलिस ने पड़ोस के घर में आरोपी के छिपे होने की सूचना पर दबिश दी। रात में पुलिस कर्मियों के आने का विरोध करने पर दरोगा ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा था। उनकी पिटाई की थी। इस मामले का भी फुटेज सामने आया। पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत की। इसके बाद ही चौकी प्रभारी के निलंबन की कार्रवाई हुई।
केस : 4 ठेल लगाने पर दरोगा को पीटा
थाना हरीपर्वत क्षेत्र में एक अस्पताल के बाहर ठेल लगाने पर दरोगा ने विक्रेता की पिटाई कर दी थी। उसके डंडा मार दिया था। वह एक संगठन का सदस्य निकला। बाद में मामला अधिकारियों तक पहुंचा। हरीपर्वत सीओ ने जांच की थी। इसके बाद दरोगा का निलंबित किया गया था। पीड़िता ने थाना में तहरीर भी दी थी। मगर, कार्रवाई नहीं हुई।
मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर जांच कराई जाती है। इसके बाद कार्रवाई की जाती है। पुलिस लाइन में मानवाधिकार प्रकोष्ठ में लगातार शिकायतें आ रही हैं। जांच के बाद कार्रवाई भी की है। बबलू कुमार, एसएसपी
मानवाधिकार आयोग की ओर से पुलिस के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। हर थाने मेें बोर्ड भी लगाए गए हैं। मगर, इन बोर्ड को एक कोने में रख दिया जाता है। पुलिस गिरफ्तारी के समय पर वारंट नहीं दिखाती है। अवैध हिरासत के मामले भी सामने आते हैं। - नरेश पारस, मानवाधिकार कार्यकर्ता