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विश्व स्वास्थ्य दिवस: अनिद्रा और चिड़चिड़ेपन से जूझ रहे युवा, जानें वजह और रखें इन बातों का ध्यान

Sun, 07 Apr 2024 07:59 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

आज के युवाओं कीआधुनिक जीवनशैली, मोबाइल का अधिक उपयोग और काम का तनाव  बीमारी दे रहा है। आलम तो ये है कि खाना खाते वक्त भी मोबाइल का प्रयोग किया जा रहा है। शारीरिक व्यायाम और योग भी दूर हो चुका है। ऐसे में तमाम बीमारियां घेर रही हैं। 
 
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तनाव - फोटो : istock
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विस्तार
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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल का अधिक उपयोग और काम का तनाव युवाओं को विभिन्न बीमारियां दे रहा है। इनमें हाई बीपी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मधुमेह और साइलेंट हार्ट अटैक जैसी बीमारियां भी शामिल हैं। इन समस्याओं से जूझ रहे युवा आए दिन उपचार और परामर्श के लिए चिकित्सकों व मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे हैं।
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सुबह देर से जागना, आनन-फानन ऑफिस के लिए तैयार होना, उल्टा सीधा नाश्ता करना और फिर पूरा दिन ऑफिस में रहने के बाद शाम को डिनर में भी कुछ पौष्टिक खाना न खाना, रात में देर तक मोबाइल देखना, फिर सुबह देर से जागना। इस तरह की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने लिए समय न निकाल पाने, शारीरिक व्यायाम अथवा योग न कर पाने के कारण युवाओं के शरीर में बीमारियां पनप रही हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. रंजीत ने बताया कि तनाव और अधिक थकान की वजह से रात में नींद कई बार टूटना या नहीं आना आम बात हो गई है। जबकि अच्छी सेहत के लिए रात में 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है। इससे शरीर को रीचार्ज होने का मौका मिलता है।
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अनिद्रा व तनाव की वजह से होती हैं कई बीमारियां
डॉ. रंजीत ने बताया कि अनिद्रा के कारण पनपने वाली बीमारियों में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, मानसिक तनाव शामिल हैं। अनिद्रा का शिकार युवा अधिक हो रहे हैं। उनके पास ही प्रतिदिन 10 से 15 मरीज उपचार और परामर्श के लिए आ रहे हैं। बताया कि नींद न आने का नकारात्मक असर दिमाग पर भी पड़ता है। त्वचा की चमक कम होती है। आंखों के नीचे काले घेरे, रूखी त्वचा और चेहरे पर महीन रेखाएं हो सकती हैं। उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ता है। भूख न लगने की भी समस्या हो सकती है।
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बचाव के उपाय
- जीवनशैली को नियमित करें।
- आवश्यकता के अनुसार ही मोबाइल आदि का प्रयोग करें।
- खेलकूद और आउटडोर पर ध्यान दें।
- जागने और सोने का समय तय करें।
- परिवार के साथ समय बिताएं।
- परेशानी महसूस होने पर मनोचिकित्सक को दिखाएं।
 
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