केस नंबर एक
शिकोहाबाद निवासी 22 वर्षीय युवक को माता-पिता ने पढ़ने के लिए दिल्ली भेजा था। पढ़ाई के दौरान युवक को लंबे समय तक खांसी रही तो उसकी टीबी की जांच कराई गई। टीबी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद एड्स की जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। काउंसलिंग में पता चला कि युवक गलत आदत का शिकार हो गया था और रेड अलर्ट एरिया में जाता था।
केस नंबर दो
टूंडला निवासी 25 वर्षीय युवक पढ़ाई के लिए हैदराबाद गया था। युवक का हमेशा बुखार रहता था। तमाम जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। वजन भी कम होने की शिकायत पर एड्स की जांच कराई तो युवक एचआईवी पॉजिटिव निकला। काउंसलिंग में जानकारी हुई कि गलत हादतों का शिकार हुआ।
सावधानी ही बचाव
सावधान ही एड्स से बचाव का तरीका है। मल्टी पार्टनर होने, एड्स संक्रमित का रक्त चढ़वाने और सामूहिक नशा करने वालों में एचआईवी की संभावना बढ़ जाती है। यदि किसी गर्भवती को एड्स है तो समय से इलाज कराने पर बच्चे को एड्स से बचाया जा सकता है। एचआईवी के लक्षण है तो व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है। तेजी से वजन कम होता है।
डॉ. पूनम अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ
एड्स के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता के लिए पूरा पखवाड़ा मनाया जाता है। इस कारण है कि मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। इस रोग से बचाव के लिए संयम की आवश्यकता है।
डॉ. दिनेश प्रेमी, सीएमओ
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