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विश्व एड्स दिवस: लाडले की तबीयत खराब होने पर कराई जांच ने किया खुलासा, पढ़ने गए परदेस और साथ ले आए एड्स

Wed, 01 Dec 2021 04:38 PM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

वर्ष 2017 में एचआईवी पॉजिटिव के 72, वर्ष 2018 में 68, वर्ष 2019 में 38 रोगी मिले। 2020 में 28 थे। 
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एचआईवी एड्स - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। आंकड़ों में एड्स के मरीजों की संख्या में गिरावट आई है लेकिन चिंता कि बात है कि वर्तमान में मिल रहे एड्स मरीजों में से अधिकांश युवा हैं। मां-बाप का सपना पूरा करने के लिए बाहर पढ़ने गए युवा एड्स का शिकार हो गए हैं। अपने लाड़ले की तबियत दिन-प्रतिदिन खराब होने पर अभिभावकों ने जांच कराई तो रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई।

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चार साल में आधी रह गई मरीजों की संख्या
जिले में चार साल में एड्स रोगियों की संख्या आधी रह गई है। वर्ष 2018 में एड्स के 66 मिले थे। वहीं 2021 में यह संख्या 26 रह गई। हालांकि इस वर्ष मिले मरीजों में युवाओं की संख्या 10 है। युवाओं का वजन तेजी से कम होने अथवा लंबे समय तक खांसी बुखार रहने, पेट खराब रहने आदि लक्षण होने पर परिजनों ने अपने लाड़लों की जांच कराई तो एड्स पॉजिटिव पाया गया। काउंसलर रेनू तिवारी ने मरीजों की काउंसिलिंग की तो जानकारी हुई मरीज गलत आदत का शिकार हो गए थे। सही समय पर जांच कराने पर मरीजों की दवा शुरू करा दी गई है। जिला अस्पताल की काउंसलर ने बताया कि  विशेषकर युवाओं का एड्स का शिकार होना चिंता का कारण है। आने वाले समय में युवाओं से परिवार बढ़ेगा और एड्स की संभावना और बढ़ जाएगी। 

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केस नंबर एक
शिकोहाबाद निवासी 22 वर्षीय युवक को माता-पिता ने पढ़ने के लिए दिल्ली भेजा था। पढ़ाई के दौरान युवक को लंबे समय तक खांसी रही तो उसकी टीबी की जांच कराई गई। टीबी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद एड्स की जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। काउंसलिंग में पता चला कि युवक गलत आदत का शिकार हो गया था और रेड अलर्ट एरिया में जाता था।

केस नंबर दो
टूंडला निवासी 25 वर्षीय युवक पढ़ाई के लिए हैदराबाद गया था। युवक का हमेशा बुखार रहता था। तमाम जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। वजन भी कम होने की शिकायत पर एड्स की जांच कराई तो युवक एचआईवी पॉजिटिव निकला। काउंसलिंग में जानकारी हुई कि गलत हादतों का शिकार हुआ।

सावधानी ही बचाव
सावधान ही एड्स से बचाव का तरीका है। मल्टी पार्टनर होने, एड्स संक्रमित का रक्त चढ़वाने और सामूहिक नशा करने वालों में एचआईवी की संभावना बढ़ जाती है। यदि किसी गर्भवती को एड्स है तो समय से इलाज कराने पर बच्चे को एड्स से बचाया जा सकता है। एचआईवी के लक्षण है तो व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है। तेजी से वजन कम होता है। डॉ. पूनम अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ

एड्स के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता के लिए पूरा पखवाड़ा मनाया जाता है। इस कारण है कि मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। इस रोग से बचाव के लिए संयम की आवश्यकता है।  डॉ. दिनेश प्रेमी, सीएमओ

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