एचआईवी (एड्स) पॉजिटिव होने पर भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। पता चलने पर यदि पीड़ित समय से इलाज करा लेता है तो उसका जीवन खुशहाल होने के साथ ही उसके होने वाले बच्चों को एचआईवी निगेटिव किया जा सकता है। मैनपुरी जिले के दो दंपती ने अपनी चुप्पी तोड़ी तो उनके बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव होने से बचा लिया गया है।
एचआईवी पॉजिटिव दंपती के पैदा होने वाले बच्चों को एचआईवी से मुक्ति दिलाई जा रही है। वर्ष 2019 में जिला अस्पताल में पहुंचे एचआईवी पॉजिटिव दो दंपतियों ने गर्भ में पल रहे बच्चों के संबंध में जानकारी दी। जिला अस्पताल की टीम ने बच्चों को जन्म के समय एक सीरप देकर उनको एचआईवी पॉजिटिव होने से बचा लिया।
नियमित उपचार लेने से जहां एचआईवी पॉजिटिव दोनों दंपती खुशहाल जीवन जी रहे हैं। वहीं उनके बच्चों के जीवन में कोई खतरा नहीं है। लोग इनसे उदाहरण लेकर सही समय से जांच कराकर अपने बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव होने से बचा सकते हैं।
मौजूदा वर्ष में 38 लोग निकले पॉजिटिव
जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो पता चलता है कि वर्ष 2019 में एक जनवरी से अब तक हुई कुल 4090 जांचों में से 29 पुरुष, सात महिलाओं तथा दो बच्चों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। 39 का मिनी पीजीआई सैफई के माध्यम से नियमित उपचार कराया जा रहा है। जबकि पांच को उपचार के लिए फाइल भेजी गई है। ये पांच नवंबर महीने में एचआईवी पॉजिटिव निकले हैं।
ये रही प्रमुख वजह
जिले में वर्ष 2019 में जिन 38 मरीजों में एचआईवी पॉजिटिव निकला है। उनमें 29 पुरुष में से 15 पुरुषों को उपाचार के दौरान दूषित रक्त चढ़वाने से, 12 को अवैध संबंधों से तथा दो को दूषित सुइयों के प्रयोग से एचआईवी पॉजिटिव हुआ है।
कुल सात महिलाओं में से छह को एचआईवी पॉजिटिव पति के साथ संबंध बनाने से तथा एक को दूषित रक्त चढ़वाने से एचआईवी पॉजिटिव हुआ। वहीं दो बच्चे जिनके माता-पिता ने उनके पैदा होने से पहले जानकारी नहीं दी। इसके चलते एचआईवी पॉजिटिव निकला।
पिछले पांच वर्ष में मिले एचआईवी पॉजिटिव मरीज
वर्ष - मरीजों की संख्या
2015 - 26
2016 - 27
2017 - 39
2018 - 30
2019 में अब तक - 38
एड्स के लक्षण
- अत्याधिक वजन कम होना
- अधिक समय तक सूखी खांसी आना
- बार-बार बुखार आना
- लसिकाओं/ग्रंथियों में सूजन होना
- एक हफ्ते से अधिक समय तक दस्त होना
- शरीर की मांसपेशियों में दर्द रहना
- जी मिचलना और उल्टी आना
- रात को पसीना आना
सीएमएस डॉ आरके सागर ने बताया कि जिला अस्पताल में एचआईवी की जांच नि:शुल्क होती है। एचआईवी पॉजिटिव मरीज की सारी जानकारी गोपनीय रखी जाती है। उसका नाम और पता किसी को नहीं बताया जाता है। बिना किसी सोच-विचार के कोई भी व्यक्ति एचआईवी की जांच करा सकता है।